पटना : बिहार सरकार ने भू-लगान (Land Revenue) वसूली व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि रोक के बावजूद जो अधिकारी या कर्मी ऑफलाइन भू-लगान रसीद जारी कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों को केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि गंभीर अनुशासनहीनता और आपराधिक कृत्य माना जाएगा।
विजय सिन्हा ने मंगलवार को कहा कि राज्य सरकार ने 2018 से ही भू-लगान भुगतान और रसीद निर्गत करने की व्यवस्था को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है। इसके बावजूद यदि कहीं भी ऑफलाइन रसीद जारी करने की पुष्टि होती है, तो उसे फर्जी दस्तावेज तैयार करने जैसा अपराध माना जाएगा। ऐसे कृत्यों में संलिप्त किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।
विभाग ने सभी जिलों को जारी किया पत्र
इस संबंध में विभाग के प्रधान सचिव सी.के. अनिल ने सभी जिलाधिकारियों (समाहर्ताओं) को पत्र भेजा है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि 2018 से 2025 तक कई बार विभागीय अधिसूचनाओं और निर्देशों के माध्यम से यह बताया जा चुका है कि ऑफलाइन भू-लगान रसीद निर्गत करने पर पूर्ण प्रतिबंध है। इसके बावजूद कुछ जिलों से अब भी ऐसी शिकायतें मिल रही हैं, जो बेहद गंभीर मामला है।
जिला मुख्यालय में सुरक्षित रखने के निर्देश
पत्र में यह भी आदेश दिया गया है कि अंचल स्तर पर उपलब्ध सभी ऑफलाइन लगान रसीदों को एकत्र कर जिला मुख्यालय में सुरक्षित रखा जाए। साथ ही इन सभी रसीदों की विस्तृत सूची बनाकर विभाग को भेजी जाए। इससे पहले भी निर्देश दिए गए थे कि पूर्व में प्रयुक्त (व्यवहृत) और अप्रयुक्त (अव्यवहृत) सभी ऑफलाइन रसीदों को जिला अभिलेखागार में निर्धारित तिथि तक जमा कराया जाए।
कुछ जिलों से रिपोर्ट, कई अब भी बाकी
इस आदेश के बाद शेखपुरा, पूर्णियां, दरभंगा, सुपौल और भागलपुर जिलों ने विभाग को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। हालांकि कई अन्य जिलों से अब तक कोई प्रतिवेदन प्राप्त नहीं हुआ है, जिस पर विभाग ने नाराजगी जताई है और जल्द रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया है।
अब भी मिल रही हैं शिकायतें
ताजा जानकारी के अनुसार सीतामढ़ी, वैशाली, पूर्वी चंपारण, सहरसा और सुपौल जैसे जिलों से अब भी ऑफलाइन भू-लगान रसीद जारी किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। विभाग का मानना है कि यह न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इसके पीछे आपराधिक साजिश की भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
डिजिटल व्यवस्था से पारदर्शिता का दावा
सरकार का कहना है कि भू-लगान भुगतान को ऑनलाइन करने का उद्देश्य भ्रष्टाचार रोकना, बिचौलियों की भूमिका खत्म करना और आम लोगों को सरल व पारदर्शी सेवा देना है। ऑनलाइन सिस्टम से हर भुगतान का डिजिटल रिकॉर्ड रहता है, जिससे फर्जीवाड़े की गुंजाइश नहीं रहती।
सख्त संदेश
उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा के इस आदेश को प्रशासनिक व्यवस्था में सख्ती का बड़ा संकेत माना जा रहा है। सरकार ने साफ कर दिया है कि नियमों की अनदेखी करने वालों पर कठोर कार्रवाई होगी। इससे आम लोगों को भी यह संदेश गया है कि वे सिर्फ ऑनलाइन माध्यम से ही भू-लगान जमा करें और किसी भी तरह की ऑफलाइन रसीद को स्वीकार न करें।
सरकार की इस कार्रवाई से उम्मीद की जा रही है कि भूमि राजस्व व्यवस्था और ज्यादा पारदर्शी होगी और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।





