समस्तीपुर : समस्तीपुर की वर्षों से बंद पड़ी चीनी मिल को दोबारा चालू करने की मांग को लेकर रविवार को जिला विकास मंच के बैनर तले नागरिक मार्च निकाला गया। बड़ी संख्या में जुटे लोगों ने “बंद समस्तीपुर चीनी मिल को चालू करो” के नारे लगाते हुए शहर में प्रदर्शन किया और अंत में चीनी मिल चौक पर सभा आयोजित की।
रविवार को कार्यकर्ता शहर के सरकारी बस स्टैंड पर एकत्रित हुए। यहां से जुलूस की शक्ल में मार्च निकाला गया, जो मुख्यालय क्षेत्र का भ्रमण करते हुए ओवरब्रिज के रास्ते चीनी मिल चौक पहुंचा। मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने जोरदार नारेबाजी की और मिल को पुनः चालू करने की मांग दोहराई। चौक पर पहुंचकर जुलूस सभा में तब्दील हो गया।
सभा की अध्यक्षता जिला विकास मंच के संयोजक शत्रुघ्न राय पंजी ने की। इस अवसर पर शंकर साह, सुरेंद्र प्रसाद सिंह, राकेश ठाकुर, उपेंद्र राय, राम विनोद पासवान, पिंकू पासवान, संतोष कुमार निराला, विश्वनाथ सिंह हजारी, शाहीद हुसैन, सुशील कुमार राय, रवि आनंद, जितेंद्र कुमार, जगलाल राय, शंभू राय और मनोज राय समेत कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे।
सभा को संबोधित करते हुए मंच के वरीय सदस्य एवं सेवानिवृत्त शिक्षक शंकर साह ने कहा कि अंग्रेज शासनकाल में स्थापित समस्तीपुर चीनी मिल कभी इस क्षेत्र की आर्थिक रीढ़ हुआ करती थी। यह मिल प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग पांच हजार परिवारों के जीवन-यापन का प्रमुख साधन थी। मिल के बंद होने के बाद हजारों श्रमिक और किसान प्रभावित हुए, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा।
वक्ताओं ने कहा कि आज भी चीनी मिल के पास पर्याप्त जमीन उपलब्ध है। मिल परिसर के आसपास सड़क, बिजली और रेल जैसी बुनियादी सुविधाएं मौजूद हैं। इसके अलावा सस्ते श्रमिकों की उपलब्धता भी इस क्षेत्र की विशेषता है। ऐसे में कम खर्च में मिल को दोबारा चालू किया जा सकता है। उन्होंने सरकार से ठोस पहल करने की मांग की।
राजद नेता राकेश ठाकुर और भाकपा (माले) के सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने भी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि बंद पड़ी चीनी मिल को चालू कराना सिर्फ एक आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक और जनजीवन से जुड़ा सवाल है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों, छात्र-नौजवानों, मजदूरों, किसानों और व्यापारियों से इस मुद्दे पर एकजुट होकर संघर्ष तेज करने की अपील की।
गौरतलब है कि समस्तीपुर चीनी मिल की स्थापना वर्ष 1917 में अंग्रेज सरकार द्वारा की गई थी। शुरुआती दौर में यह मिल सुचारु रूप से संचालित होती रही, लेकिन वर्ष 1995 में इसे बंद कर दिया गया। इसके बाद कई बार इसे पुनः चालू करने की मांग उठी और प्रयास भी हुए, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आ सका है।
नागरिकों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस दिशा में शीघ्र कदम नहीं उठाया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि चीनी मिल के पुनरारंभ से क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और समस्तीपुर की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।





