सुपौल : जिला मुख्यालय के भेलाही स्थित साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित प्रसिद्ध लेखक डॉ. महेन्द्र के आवास पर विगत शनिवार को किसुन संकल्प लोक के तत्वावधान में आयोजित एक साहित्यिक कार्यक्रम में मैथिली की पाँच महत्त्वपूर्ण पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर साहित्यकारों ने मैथिली में कथा, कविता, अनुवाद और आलोचना के क्षेत्र में हो रहे रचनात्मक प्रयासों की सराहना की।
कार्यक्रम में पटना विश्वविद्यालय के अवकाशप्राप्त प्राध्यापक एवं वरिष्ठ लेखक डॉ. इन्द्रकान्त झा के कथा-संग्रह ऑक्सीजन, अनूदित कविता-संग्रह मैथिलीक आंगनमे मलयालम कविताक पथार तथा हाइकू-संग्रह का लोकार्पण किया गया। इसके अतिरिक्त, सुपौल के चकला निर्मली निवासी कथाकार-समीक्षक आशीष चमन के कथा-संग्रह भरि रातिक कथा एवं आलोचनात्मक निबंध-संग्रह शब्दक यात्रा का भी उपस्थित साहित्यकारों द्वारा विमोचन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. महेन्द्र ने कहा कि उम्र के इस पड़ाव पर भी डॉ. इन्द्रकान्त झा की लेखकीय सक्रियता प्रशंसनीय है। उनकी साहित्य-साधना नई पीढ़ी के रचनाकारों के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने लेखक के दीर्घायु, स्वस्थ एवं निरंतर सक्रिय रहने की कामना की।
इस मौके पर लेखक -सम्पादक केदार कानन ने दोनों लेखकों को बधाई देते हुए कहा कि डॉ. इन्द्रकान्त झा की तीनों पुस्तकें साहित्यिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण हैं। विशेष रूप से मलयालम कविताओं का मैथिली में अनुवाद एक सराहनीय प्रयास है। इससे मैथिली के पाठकों को मलयालम भाषा की कविता, संवेदना और काव्य-दृष्टि से परिचित होने का अवसर मिलेगा।
कवि कुमार विक्रमादित्य ने आशीष चमन के आलोचनात्मक निबंध-संग्रह शब्दक यात्रा की चर्चा करते हुए कहा कि यह पुस्तक मैथिली आलोचना की परंपरा को निरंतरता प्रदान करती है। वरिष्ठ लेखिका सुस्मिता पाठक ने डॉ. इन्द्रकान्त झा के हाइकू-संग्रह के प्रकाशन को मैथिली साहित्य के लिए उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि साहित्य की विविध विधाओं में लेखन और प्रकाशन से भाषा की अभिव्यक्ति-क्षमता का विस्तार होता है। युवा कवयित्री दीपिका चन्द्रा ने आशीष चमन के कथा-संग्रह भरि रातिक कथा की सराहना करते हुए कहा कि उनकी रचनाओं में ठेठ शब्दों का प्रयोग और विषय-वस्तु की सहजता विशेष महत्त्व रखती है। उनकी भाषा और कथ्य युवा रचनाकारों के लिए भी उपयोगी हैं।
कवयित्री नन्दिनी पाठक ने कहा कि मैथिली में कथा, कविता और आलोचना जैसी विविध विधाओं में पुस्तकों का प्रकाशन भाषा-साहित्य की परंपरा को समृद्ध करता है। अपनी बात रखते हुए कवि और सामाजिक चिन्तक विवेकानन्द झा ने कहा कि मैथिली साहित्य की समृद्धि के लिए सृजन के साथ-साथ पुस्तकों के प्रकाशन और उन पर सार्थक चर्चा की भी आवश्यकता है। इस प्रकार के आयोजन साहित्यकारों को प्रोत्साहित करने के साथ पाठकों को नई रचनाओं से जोड़ने का महत्त्वपूर्ण माध्यम बनते हैं।
कार्यक्रम संचालन के क्रम में लेखक व फिल्म एक्टिविस्ट किसलय कृष्ण ने कहा कि मैथिली साहित्य में विभिन्न विधाओं की निरंतरता और नए विषयों पर लेखन भाषा के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है। कार्यक्रम में गिरिबाला झा,लेखक आशीष चमन, मनोज कुमार, राजा झा सहित अन्य साहित्यप्रेमी एवं साहित्यकार उपस्थित रहे।




