पटना : बिहार की राजनीति में एक ही दिन दो बड़ी और प्रतीकात्मक राजनीतिक गतिविधियां सामने आईं, जिसने सत्ता और विपक्ष दोनों की रणनीति को उजागर कर दिया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जहां “समृद्धि यात्रा” के जरिए विकास का संदेश लेकर जिलों की ओर रवाना हुए, वहीं नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने उसी दिन राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की कोर कमेटी की अहम बैठक बुलाकर संगठन में बड़े बदलावों का संकेत दे दिया।
नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा: विकास का रोडमैप
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा केवल औपचारिक दौरा नहीं, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही है। इस यात्रा के जरिए वे सरकार की योजनाओं, उपलब्धियों और भविष्य के विज़न को सीधे जनता तक पहुंचा रहे हैं।
नीतीश कुमार जिलों में जाकर शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, रोजगार और सामाजिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं की प्रगति का फीडबैक ले रहे हैं। उनका फोकस यह बताने पर है कि सरकार “काम के आधार पर” जनता का भरोसा मांग रही है।
तेजस्वी यादव की कोर कमेटी बैठक: संगठन की सर्जरी
इसी दिन पोलो रोड स्थित अपने सरकारी आवास पर तेजस्वी यादव ने RJD की कोर कमेटी की अहम बैठक बुलाई। विदेश यात्रा से लौटने के बाद यह उनकी पहली औपचारिक बैठक थी, लेकिन इसके मायने कहीं ज़्यादा बड़े माने जा रहे हैं।
बैठक का मुख्य एजेंडा संगठनात्मक रिपोर्ट की समीक्षा रहा, जिसे प्रदेश अध्यक्ष संजय यादव ने विधानसभा स्तर की बैठकों के बाद तैयार किया है। इस रिपोर्ट में पार्टी की मजबूती और कमजोरियों का विस्तार से उल्लेख है।
निष्क्रिय नेताओं पर गिरेगी गाज?
सूत्रों के अनुसार, इस रिपोर्ट के आधार पर कई नेताओं और पदाधिकारियों की भूमिका पर पुनर्विचार किया जा सकता है। जिनकी सक्रियता संतोषजनक नहीं पाई गई, उन्हें जिम्मेदारियों से हटाया जा सकता है या नई भूमिका दी जा सकती है।
तेजस्वी यादव का साफ संदेश है कि अब पार्टी में ढिलाई, गुटबाज़ी और निष्क्रियता नहीं चलेगी। जो काम करेगा, वही आगे बढ़ेगा।
2025 चुनाव की तैयारी में RJD
तेजस्वी यादव की रणनीति साफ है—पार्टी को पूरी तरह चुनावी मोड में लाना। बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करना, युवाओं और कार्यकर्ताओं को जोड़ना और जनता के मुद्दों पर आक्रामक रुख अपनाना उनकी प्राथमिकता है।
RJD अब सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि एक मजबूत विकल्प के तौर पर खुद को पेश करना चाहती है।
सत्ता बनाम संगठन: क्या है सियासी संदेश?
नीतीश कुमार की यात्रा और तेजस्वी यादव की बैठक, दोनों एक ही दिन होना महज संयोग नहीं माना जा रहा। एक तरफ सरकार अपने काम को दिखा रही है, दूसरी तरफ विपक्ष अपने ढांचे को मज़बूत कर रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह दोनों गतिविधियां 2025 विधानसभा चुनाव की तैयारी का साफ संकेत हैं। बिहार की राजनीति अब धीरे-धीरे चुनावी रंग में रंगने लगी है।
आने वाले दिनों में बढ़ेगी सियासी गर्मी
नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा जहां विकास का संदेश लेकर आगे बढ़ रही है, वहीं तेजस्वी यादव की संगठनात्मक सर्जरी विपक्ष को नई धार देने की कोशिश है।
आने वाले महीनों में बिहार की राजनीति और तेज़ होगी, और जनता के बीच सत्ता बनाम संगठन की यह जंग और दिलचस्प होने वाली है।





