बिहार के बेतिया जिले में निगरानी विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गव्य क्षेत्रीय पदाधिकारी अनुराग अभिषेक को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। बताया जा रहा है कि वह एक डेयरी संचालक से सरकारी अनुदान स्वीकृत कराने के बदले 62 हजार रुपये की रिश्वत मांग रहा था। शिकायत मिलने के बाद निगरानी टीम ने जाल बिछाकर उसे पकड़ लिया।
जानकारी के अनुसार अनुराग अभिषेक मूल रूप से मोतिहारी के छतौनी के रहने वाले हैं। उन्हें सरकारी सेवा में आए अभी लगभग आठ महीने ही हुए थे, लेकिन इस दौरान ही वे भ्रष्टाचार के आरोपों में घिर गए। बताया जाता है कि उन्होंने जून 2025 में पटना में योगदान दिया था और अगस्त 2025 में उनकी पदस्थापना बेतिया में की गई थी।
शिकायत के अनुसार एक डेयरी संचालक से सरकारी अनुदान की राशि स्वीकृत कराने के लिए उन्होंने कुल 62 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी। इसमें से 12 हजार और 20 हजार रुपये दो अलग-अलग बार ऑनलाइन माध्यम से अपने एक परिचित के बैंक खाते में भी मंगवाए थे। निगरानी विभाग अब उस खाते के धारक की भी तलाश कर रहा है।
शुक्रवार को निगरानी की टीम ने कार्रवाई करते हुए बेतिया स्थित कार्यालय में उन्हें रंगे हाथ पकड़ लिया। जानकारी के अनुसार टीम दोपहर करीब 2:30 बजे कार्यालय परिसर पहुंची और लगभग 20 मिनट तक उनकी गतिविधियों पर नजर रखती रही। इसके बाद डेयरी संचालक को रिश्वत की रकम देने का संकेत दिया गया। जैसे ही राशि दी गई, टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए अधिकारी को पकड़ लिया।
गिरफ्तारी के बाद निगरानी टीम ने कार्यालय के मुख्य गेट को अंदर से बंद कर करीब दो घंटे तक विभिन्न संचिकाओं की जांच की। इस दौरान समग्र गव्य विकास योजना से संबंधित फाइलों की बारीकी से जांच की गई। अधिकारियों ने यह भी पता लगाने की कोशिश की कि किन-किन लाभार्थियों को अनुदान का भुगतान किया गया है और किनका भुगतान अभी लंबित है।
स्थानीय लोगों के अनुसार अधिकारी के खिलाफ पहले भी अनौपचारिक शिकायतें सामने आती रही थीं। बताया जाता है कि वह कई मामलों में पैसे की मांग करता था और ऑनलाइन माध्यम से रकम लेने से भी परहेज नहीं करता था।
गौरतलब है कि इससे पहले 2 मार्च को भी जिले में निगरानी की टीम ने शिक्षा विभाग के एक सहायक अभियंता को पांच लाख रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। बाद में उनके आवास की तलाशी में 42 लाख रुपये नकद बरामद हुए थे।
महज 11 दिनों के भीतर जिले में दो अलग-अलग मामलों में अधिकारियों की गिरफ्तारी ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार हो रही निगरानी की कार्रवाइयों के बावजूद रिश्वतखोरी की घटनाएं सामने आना चिंता का विषय बनता जा रहा है।





