समस्तीपुर : पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत समस्तीपुर रेलमंडल में कम टिकट बिक्री वाले करीब 10 रेलवे रिजर्वेशन काउंटरों को बंद करने का फैसला लिया गया है। रेलवे बोर्ड के निर्देश के बाद यह कदम उठाया जा रहा है। जिन स्टेशनों पर औसतन 25 से भी कम टिकट बुक हो रहे हैं, वहां अलग से रिजर्वेशन काउंटर चलाने के बजाय उन्हें PRS-cum-UTS टर्मिनल में बदला जाएगा या दूसरी जगह मर्ज किया जाएगा।
रेलवे बोर्ड के फैसले के बाद पूर्व मध्य रेल सहित सभी जोन को ऐसे काउंटरों की पहचान करने का निर्देश मिला था, जहां टिकट बिक्री बेहद कम है। इसके तहत समस्तीपुर मंडल में जांच की गई और रिपोर्ट डीआरएम समस्तीपुर को सौंप दी गई है। जांच में पाया गया कि मंडल के कई स्टेशनों पर रिजर्वेशन काउंटरों की उपयोगिता काफी कम हो गई है, क्योंकि ज्यादातर यात्री अब ऑनलाइन माध्यम से टिकट बुक कर रहे हैं।
इन स्टेशनों पर काउंटर बंद करने की तैयारी
जांच के दौरान बिरौल, घोघरडीहा, निर्मली, ढेंग, सिकटा, बाजपट्टी, बिहारीगंज और राघोपुर स्टेशन पर वर्तमान में स्टेशन टिकट बुकिंग एजेंट द्वारा अनारक्षित टिकट जारी करने का काम किया जा रहा है। अगर यहां पीआरएस (यात्री आरक्षण प्रणाली) को पीआरएस-कम-यूटीएस टर्मिनल में बदला जाता है, तो स्टेशन टिकट बुकिंग एजेंट की सेवा बंद कर दी जाएगी और वहां नियमित रेल कर्मचारी की नियुक्ति की जाएगी।
इसी तरह बिरौल, घोघरडीहा, निर्मली, ढेंग, सिकटा, बाजपट्टी, बिहारीगंज, राघोपुर स्टेशन और डुमरा कोर्ट के यात्री आरक्षण प्रणाली (PRS) लोकेशन को भी बंद करने की तैयारी है। इन स्थानों पर यात्रियों को आईआरसीटीसी वेबसाइट और मोबाइल ऐप के जरिए टिकट बुकिंग की प्रक्रिया का प्रचार-प्रसार किया जाएगा, ताकि लोग डिजिटल माध्यम अपनाएं।
एक ही खिड़की से दोनों तरह के टिकट
रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि जिन काउंटरों पर औसतन 25 से कम टिकट बुक होते हैं, उन्हें अब अलग से चलाने की जरूरत नहीं है। ऐसे काउंटरों को PRS-cum-UTS टर्मिनल में बदला जाएगा, ताकि यात्रियों को रिजर्वेशन और जनरल टिकट के लिए अलग-अलग खिड़कियों पर भटकना न पड़े। एक ही खिड़की से दोनों तरह के टिकट मिल सकेंगे।
डिजिटलाइजेशन का असर
रेलवे का मानना है कि यह फैसला टिकट बुकिंग के क्षेत्र में तेजी से बढ़ते डिजिटलाइजेशन का नतीजा है। वर्तमान में लगभग 87 प्रतिशत रिजर्वेशन टिकट ऑनलाइन माध्यम से बुक किए जा रहे हैं। इससे कई छोटे स्टेशनों पर काउंटरों की उपयोगिता कम हो गई है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस बदलाव से संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और यात्रियों को भी आधुनिक, सुविधाजनक और पारदर्शी सेवा मिलेगी।




