पटना : बिहार की नई एनडीए सरकार के गठन के बाद सबसे बड़ी राजनीतिक चर्चा आखिरकार स्पष्ट होने लगी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 10वीं बार सत्ता संभालने के बाद से ही मंत्रियों के विभाग बंटवारे को लेकर अटकलों का दौर जारी था। लेकिन अब यह साफ हो गया है कि इस बार गृह मंत्रालय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद नहीं रखा है। हैरान करने वाला राजनीतिक घटनाक्रम यह है कि गृह विभाग की कमान उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को सौंपी गई है।
यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बिहार की राजनीति में गृह मंत्रालय हमेशा से ही सबसे अहम पोर्टफोलियो में माना जाता है। सुरक्षा, कानून व्यवस्था और प्रशासनिक नियंत्रण जैसे मुद्दों से सीधे तौर पर जुड़ा यह विभाग अब बीजेपी के कद्दावर नेता और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास रहेगा। यह कदम भाजपा-जेडीयू संबंधों के नए संतुलन की ओर संकेत करता है।
राज्यपाल से मुलाकात के बाद आई तेजी
मंत्रालयों के बंटवारे को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को राजभवन पहुंचकर राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान से मुलाकात की। राज्यपाल दिन में एलएनएमयू, दरभंगा के दीक्षांत समारोह में शामिल होने के बाद पटना लौटे थे। इसके तुरंत बाद विभाग आवंटन की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की गतिविधियां तेज हो गईं।
सूत्रों के अनुसार, शाम तक 18 मंत्रियों को अंतिम विभाग आवंटन की सूची जारी कर दी गई।
बीजेपी को मिल सकते हैं बड़े मंत्रालय
एनडीए सरकार में बीजेपी अब तक की तुलना में अधिक प्रभावी और मजबूत भूमिका निभाती दिख रही है। वित्त मंत्रालय समेत कई बड़े विभाग भाजपा कोटे के मंत्रियों को दिए जाने की चर्चा है। इसमें शामिल हैं:
- वित्त विभाग
- उद्योग मंत्रालय
- स्वास्थ्य विभाग
- कृषि मंत्रालय
- पर्यटन मंत्रालय
- खनन विभाग
- पथ निर्माण विभाग
- सहकारिता विभाग
इन विभागों के जरिए बीजेपी प्रशासनिक और आर्थिक नीति स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। गृह मंत्रालय भी उपमुख्यमंत्री को देकर राजनीतिक संदेश साफ कर दिया गया है कि पार्टी इस बार शासन तंत्र में निर्णायक भूमिका में रहेगी।
जेडीयू को भी मिले अहम विभाग
जेडीयू कोटे के मंत्रियों के लिए भी कई महत्वपूर्ण विभाग तय किए गए हैं। उम्मीद है कि जेडीयू को ये मंत्रालय मिलेंगे:
- संसदीय कार्य मंत्रालय
- शिक्षा विभाग
- परिवहन मंत्रालय
- जल संसाधन विभाग
- ग्रामीण विकास मंत्रालय
- भवन निर्माण विभाग
इन विभागों के जरिए मुख्यमंत्री का फोकस सुशासन, विकास योजनाओं और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर रहेगा।
स्पीकर पद पर प्रेम कुमार की चर्चा
बीजेपी की ओर से एक और महत्वपूर्ण राजनीतिक हलचल सामने आई है। गया टाउन सीट से 1990 से लगातार चुनाव जीतते आ रहे वरिष्ठ नेता प्रेम कुमार को इस बार मंत्री नहीं बनाया गया। भाजपा के भीतर यह चर्चा तेज है कि उन्हें विधानसभा के स्पीकर पद की जिम्मेदारी दी जा सकती है। यह पद पहले से ही बीजेपी की हिस्सेदारी में रहने की परंपरा को आगे बढ़ा सकता है।
प्रेम कुमार लंबे समय से संगठन और सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आए हैं। इसलिए उनके स्पीकर बनने की संभावना मजबूत मानी जा रही है।
कैबिनेट विस्तार भी होगा—खरमास के बाद
नीतीश कुमार ने जेडीयू की बैठक में यह भी स्पष्ट किया था कि खरमास के बाद कैबिनेट का विस्तार किया जाएगा।
मौजूदा मंत्रिमंडल में कुल 27 सदस्य (सीएम सहित) शामिल हैं:
- बीजेपी – 14 मंत्री
- जेडीयू – 9 मंत्री
- लोजपा (रा) – 2 मंत्री
- हम – 1 मंत्री
- रालोमो – 1 मंत्री
कैबिनेट में अभी भी लगभग 9 मंत्रियों की जगह खाली है, जिसमें सबसे अधिक हिस्सेदारी जेडीयू की होगी।
राजनीतिक संदेश क्या है?
गृह मंत्रालय का सम्राट चौधरी को मिलना इस सरकार की राजनीतिक दिशा को स्पष्ट संकेत देता है—
- बीजेपी अब सरकार में बराबरी से नहीं बल्कि निर्णायक सहयोगी के रूप में दिखना चाहती है।
- नीतीश कुमार प्रशासनिक सुधार और विकास पोर्टफोलियो पर अपना ध्यान केंद्रित करेंगे।
- एनडीए सरकार अगले 5 वर्षों की राजनीतिक संतुलन और शक्ति वितरण का नया मॉडल पेश कर रही है।
बिहार की राजनीति में विभागों का बंटवारा हमेशा से बेहद संवेदनशील विषय रहा है। इस बार का वितरण सत्ता समीकरण और नीति प्राथमिकताओं—दोनों में गहरे बदलाव का संकेत देता है। अब आने वाले दिनों में कैबिनेट विस्तार और सरकार की पहली बैठक से यह साफ होगा कि यह नई सरकार जनता की उम्मीदों पर कितनी तेजी से काम शुरू करती है।



