नॉर्थ-साउथ ब्लॉक गुलामी के प्रतीक, ‘सेवा तीर्थ’ से नई शुरुआत: PM मोदी
13 फरवरी को नए प्रशासनिक परिसर का अनावरण, कहा—140 करोड़ देशवासियों की आकांक्षाओं का केंद्र बनेगा कर्तव्य भवन
नई दिल्ली में शुक्रवार को प्रधानमंत्री Narendra Modi ने नए प्रशासनिक परिसर ‘सेवा तीर्थ’ का अनावरण करते हुए इसे भारत की विकास यात्रा में “नए युग की शुरुआत” बताया। उन्होंने कहा कि 13 फरवरी का दिन देश के इतिहास में एक नए अध्याय का साक्षी बन रहा है। विकसित भारत के संकल्प के साथ सरकार अब ‘कर्तव्य भवन’ में प्रवेश कर रही है, जहां से लिए जाने वाले निर्णय 140 करोड़ देशवासियों की अपेक्षाओं को आगे बढ़ाएंगे।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आजादी के बाद North Block और South Block जैसी इमारतों से अनेक महत्वपूर्ण नीतियां बनीं और देश को दिशा मिली। हालांकि, उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ये भवन ब्रिटिश साम्राज्य की सोच और सत्ता के प्रतीक के रूप में बनाए गए थे। उनका उद्देश्य औपनिवेशिक शासन की ताकत और श्रेष्ठता को दर्शाना था।
प्रधानमंत्री ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि एक समय देश की राजधानी Kolkata हुआ करती थी, लेकिन 1905 के बंगाल विभाजन के बाद वहां ब्रिटिश विरोधी आंदोलन तेज हो गया। इसके बाद 1911 में अंग्रेजों ने राजधानी को Delhi स्थानांतरित कर दिया। उसी दौर में Raisina Hills पर नॉर्थ और साउथ ब्लॉक जैसी भव्य इमारतों का निर्माण शुरू हुआ, जिन्हें ऊंचाई पर इस तरह बनाया गया ताकि वे अन्य संरचनाओं से ऊपर दिखें और सत्ता का प्रभाव प्रदर्शित करें।
उन्होंने कहा कि उस समय के वायसराय ने उद्घाटन के अवसर पर स्पष्ट किया था कि ये भवन ब्रिटिश सम्राट की इच्छाओं के अनुरूप बनाए गए हैं। यानी उनकी संरचना और वास्तुशिल्प गुलाम भारत पर ब्रिटिश सत्ता की छाप छोड़ने के उद्देश्य से तैयार की गई थी।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इसके विपरीत ‘सेवा तीर्थ’ और कर्तव्य भवन जमीन से जुड़े हुए परिसर हैं, जो जनता की सेवा और आधुनिक प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि 21वीं सदी के भारत की कार्यसंस्कृति, तकनीक और दक्षता के अनुरूप कार्यस्थल होना जरूरी है।
प्रधानमंत्री के अनुसार, करीब 100 वर्ष पुरानी इमारतें अब जर्जर हो रही थीं और आधुनिक तकनीकी ढांचे के अनुकूल नहीं रहीं। उन्होंने बताया कि आजादी के दशकों बाद भी भारत सरकार के कई मंत्रालय दिल्ली में 50 से अधिक अलग-अलग स्थानों से संचालित हो रहे थे। इन इमारतों के किराए पर प्रतिवर्ष 1500 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होते थे, जबकि रोजाना हजारों कर्मचारियों के आवागमन पर अतिरिक्त लॉजिस्टिक लागत आती थी।
नए परिसर के निर्माण से इन खर्चों में कमी आएगी, समय की बचत होगी और प्रशासनिक कार्यों की उत्पादकता बढ़ेगी। प्रधानमंत्री ने यह भी घोषणा की कि पुराने भवनों को संग्रहालय के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि वे भारत के इतिहास और लोकतांत्रिक विकास की प्रेरक धरोहर बन सकें।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ने के लिए देश को गुलामी की मानसिकता से मुक्त होना आवश्यक है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पहले प्रधानमंत्री आवास को ‘रेसकोर्स’ कहा जाता था और लोकतंत्र में राष्ट्रपति भवन तक जाने वाले मार्ग को ‘राजपथ’ कहा जाता था। आज इन नामों और प्रतीकों को बदलकर भारत अपनी पहचान और आत्मसम्मान को पुनर्स्थापित कर रहा है।
प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि ‘सेवा तीर्थ’ से लिए जाने वाले निर्णय देश को आत्मनिर्भर, आधुनिक और विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में मजबूत कदम साबित होंगे।





