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मोजतबा खामेनेई बने ईरान के नए सुप्रीम लीडर

असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स की मुहर, खामेनेई की मौत के बाद उत्तराधिकार संकट में IRGC के दबाव के बीच मोजतबा को मिली जिम्मेदारी।

खामेनेई के बेटे मोजतबा को चुना गया ईरान का सुप्रीम लीडर (फोटो- रॉयटर)

Iran Politics : ईरान में सत्ता परिवर्तन को लेकर चल रहे लंबे इंतजार के बाद आखिरकार नए सर्वोच्च नेता का ऐलान कर दिया गया है। विशेषज्ञ सभा (असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स) ने बुधवार को मोजतबा खामेनेई को देश का नया सुप्रीम लीडर चुन लिया। यह फैसला पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उत्पन्न उत्तराधिकार संकट के बीच लिया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह चयन ऐसे समय में हुआ जब देश अमेरिका और इजरायल के साथ जारी सैन्य तनाव से गुजर रहा है। 28 फरवरी को हुए हवाई हमलों में अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान की सत्ता अस्थायी रूप से तीन सदस्यीय अंतरिम परिषद के हाथों में चली गई थी। इस परिषद में राष्ट्रपति, न्यायपालिका प्रमुख और गार्जियन काउंसिल के एक वरिष्ठ धर्मगुरु शामिल थे।

बताया जा रहा है कि विशेषज्ञ सभा की पूर्ण बैठक मौजूदा युद्ध परिस्थितियों के कारण संभव नहीं हो सकी। ऐसे में आभासी बैठकों और आंतरिक विचार-विमर्श के जरिए मोजतबा खामेनेई के नाम पर सहमति बनी। ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, इस फैसले में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) की अहम भूमिका रही।

सूत्रों का कहना है कि IRGC ने कट्टरपंथी धड़ों को एकजुट कर मोजतबा के पक्ष में माहौल बनाया। मोजतबा लंबे समय से अपने पिता के करीबी सहयोगी माने जाते रहे हैं और सुरक्षा तंत्र में उनकी मजबूत पकड़ बताई जाती है। यही कारण है कि संकट की घड़ी में उन्हें “सुरक्षित विकल्प” के रूप में आगे बढ़ाया गया।

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56 वर्षीय मोजतबा खामेनेई एक मध्यम स्तर के शिया धर्मगुरु हैं। उन्हें ‘हुज्जतुल इस्लाम’ की उपाधि प्राप्त है, जो सर्वोच्च नेता पद के लिए अपेक्षाकृत निम्न धार्मिक रैंक मानी जाती है। इसी कारण उनकी नियुक्ति पर विवाद भी शुरू हो गया है। कई विश्लेषकों का मानना है कि ईरान की इस्लामी क्रांति की मूल भावना वंशानुगत सत्ता हस्तांतरण के खिलाफ रही है। ऐसे में पिता से पुत्र को सर्वोच्च पद मिलना कुछ धड़ों को “राजशाही जैसी व्यवस्था” की ओर इशारा करता प्रतीत हो सकता है।

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हालांकि, मौजूदा हालात में IRGC का समर्थन निर्णायक साबित हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नियुक्ति से ईरान में कट्टरपंथी ताकतों की स्थिति और मजबूत होगी, खासकर ऐसे समय में जब देश बाहरी हमलों और आंतरिक अस्थिरता से जूझ रहा है।

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अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि मोजतबा खामेनेई अपने नेतृत्व में ईरान की विदेश नीति और सैन्य रणनीति को किस दिशा में ले जाते हैं। जारी युद्ध और क्षेत्रीय तनाव के बीच उनका पहला कदम बेहद अहम माना जा रहा है।

Gaam Ghar Desk

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