बिहार में सरकारी जमीन को निजी व्यक्तियों के नाम पर फर्जी तरीके से दर्ज (जमाबंदी) कराने के मामलों पर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने स्पष्ट किया है कि अब ऐसी अवैध जमाबंदी को अधिकतम 45 दिनों के भीतर रद्द किया जाएगा। साथ ही दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी और लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अंचल अधिकारियों (CO) पर भी अनुशासनिक कार्रवाई तय है।
विभाग के प्रधान सचिव सी.के. अनिल ने राज्य के सभी जिलों के एडीएम (अपर जिला दंडाधिकारी) को निर्देश जारी किए हैं कि वे सरकारी जमीन की गलत, संदिग्ध या अवैध जमाबंदी की पहचान कर उसे रद्द कराने की प्रक्रिया तुरंत शुरू करें। यह पहल एडीएम अपने स्तर से (सुओ-मोटो), राजस्व अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर या किसी आवेदक से मिली सूचना पर जांच के बाद कर सकते हैं।
CO पर भी होगी कार्रवाई
3 जून 1974 से अंचल अधिकारी अपने-अपने अंचल में सरकारी जमीन के लिए कलेक्टर घोषित हैं। यदि किसी CO के कार्यकाल में सरकारी जमीन का अवैध हस्तांतरण पाया जाता है या निजी व्यक्तियों के नाम पर जमाबंदी खोलने व दाखिल-खारिज की गड़बड़ी सामने आती है, तो उनके खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
45 दिनों में पूरी होगी प्रक्रिया
फर्जी जमाबंदी को रद्द करने की प्रक्रिया RCMS पोर्टल के माध्यम से शुरू होगी। जांच से संतुष्ट होने के बाद एडीएम आवेदन पर कार्रवाई करेंगे। आवेदन मिलने के तीन दिन के भीतर नोटिस जारी होगा। इसके बाद सुनवाई शुरू होगी, जो अधिकतम 15 दिनों में तीन बार तक हो सकती है। सुनवाई के बाद सात दिनों के भीतर लिखित स्टेटमेंट दिया जाएगा। अंतिम आदेश जारी कर उसे RCMS पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। इस तरह पूरी प्रक्रिया 45 दिनों के भीतर पूरी की जाएगी।
राज्य सरकार के इस फैसले से सरकारी जमीन पर कब्जा और फर्जी जमाबंदी पर रोक लगेगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भूमि रिकॉर्ड की विश्वसनीयता मजबूत होगी। साथ ही यह संदेश भी जाएगा कि सरकारी जमीन से जुड़ी गड़बड़ियों पर अब कोई ढील नहीं दी जाएगी।




