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33 साल में लता मंगेशकर को ज़हर दिया गया, मौत से बाल-बाल…

33 साल की उम्र में लता मंगेशकर को दिया गया था ‘ज़हर’, बाल-बाल बची थी सुर साम्राज्ञी की जान

मुंबई : ‘सुरों की रानी’ और ‘भारत रत्न’ से सम्मानित लता मंगेशकर का नाम आते ही एक पूरी पीढ़ी की यादें और भावनाएँ जीवंत हो उठती हैं। उनकी सुरीली आवाज़ ने दशकों तक हिंदी सिनेमा को दिशा दी। “आएगा आनेवाला”, “अजीब दास्तां है ये”, “आपकी नज़रें समझा”, “प्यार किया तो डरना क्या”, “मेरा साया साथ होगा”, “पिया तोसे” और “आज फिर जीने की तमन्ना” जैसे अनगिनत गीतों ने उन्हें अमर बना दिया। लेकिन उनकी ज़िंदगी में एक ऐसा भयावह दौर भी आया, जब वह मौत के मुंह से लौटकर आईं। बहुत कम लोगों को पता है कि 33 साल की उम्र में लता मंगेशकर को धीरे-धीरे ज़हर दिया गया था।

लता मंगेशकर का निधन 6 फरवरी 2022 को हुआ, और इसके साथ ही संगीत की दुनिया में एक युग का अंत हो गया। उनके जाने के बाद भी उनसे जुड़ी कई कहानियाँ सामने आती रहती हैं, जिनमें से एक सबसे चौंकाने वाली घटना 1962 की है। उस समय लता अपने करियर के शिखर पर थीं, हर बड़े संगीतकार और निर्देशक की पहली पसंद थीं। तभी अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी और वह महीनों तक बिस्तर से उठ नहीं सकीं।

यह किस्सा खुद लता मंगेशकर ने मशहूर लेखिका नसरीन मुन्नी कबीर को दिए इंटरव्यू में बताया था, जो बाद में किताब ‘Lata Mangeshkar in Her Own Voice’ में शामिल हुआ। लता ने उस समय को याद करते हुए कहा था कि एक सुबह उन्हें पेट में तेज़ बेचैनी महसूस हुई। देखते-देखते हालत इतनी बिगड़ गई कि उन्हें बार-बार उल्टियाँ होने लगीं। उल्टी का रंग हरा था और शरीर बेहद कमजोर हो गया था। वे इतनी बीमार थीं कि हिल भी नहीं पा रही थीं।

डॉक्टरों को तुरंत बुलाया गया। घर पर ही एक्स-रे मशीन मंगाई गई, क्योंकि उन्हें अस्पताल ले जाना संभव नहीं था। जाँच के बाद डॉक्टरों ने जो कहा, वह पूरे परिवार के लिए किसी सदमे से कम नहीं था। डॉक्टरों का मानना था कि लता मंगेशकर को “धीरे-धीरे ज़हर” दिया जा रहा है। यानी कोई उन्हें लंबे समय से ज़हर की छोटी-छोटी खुराक दे रहा था, जिससे उनका शरीर अंदर ही अंदर कमजोर होता जा रहा था।

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इस बात का पता चलते ही घर में हड़कंप मच गया। लता की बहन उषा मंगेशकर तुरंत रसोई में गईं और साफ कहा कि अब से लता के लिए खाना नौकर नहीं, बल्कि परिवार का कोई सदस्य बनाएगा। उस आदेश के बाद एक नौकर बिना पैसे लिए ही अचानक घर छोड़कर चला गया। इसी से शक और गहरा हो गया कि कहीं वही व्यक्ति तो इस साजिश में शामिल नहीं था।

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लता मंगेशकर ने बाद में बताया था कि परिवार को यह भी पता चल गया था कि वह व्यक्ति कौन था, जिसने उन्हें ज़हर दिया था। लेकिन उन्होंने उसके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की। लता ने कहा था, “हमें पता था कि वह कौन था, लेकिन हमारे पास कोई ठोस सबूत नहीं था। और हम मंगेशकर इस बारे में ज्यादा बात नहीं करते, क्योंकि वह हमारी ज़िंदगी का बहुत बुरा दौर था।”

करीब तीन महीने तक लता मंगेशकर गंभीर रूप से बीमार रहीं। उनके फैंस और फिल्म इंडस्ट्री में यह अफवाह फैल गई थी कि शायद अब वह दोबारा कभी गा नहीं पाएंगी। कुछ लोगों ने यह तक कहना शुरू कर दिया था कि ज़हर देने की वजह से उनकी आवाज़ चली गई है। लेकिन लता ने खुद इन अफवाहों को खारिज किया।

उन्होंने साफ कहा था, “यह सच नहीं है कि मेरी आवाज़ चली गई थी। किसी डॉक्टर ने मुझसे यह नहीं कहा कि मैं फिर से गा नहीं पाऊंगी। हमारे फैमिली डॉक्टर डॉ. आर. पी. कपूर ने तो मुझे हमेशा उम्मीद दी कि मैं पूरी तरह ठीक होकर वापस गाऊंगी।” लता ने यह भी कहा था कि ज़हर दिए जाने की बात तो सच थी, लेकिन उससे उनकी आवाज़ पर कोई स्थायी असर नहीं पड़ा।

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धीरे-धीरे इलाज के बाद उनकी हालत में सुधार हुआ। जब वे पूरी तरह ठीक हो गईं, तो सबसे पहले संगीतकार हेमंत कुमार ने उनके साथ रिकॉर्डिंग की। यह गाना था फिल्म ‘बीस साल बाद’ का मशहूर गीत “कहीं दीप जले कहीं दिल”। यह गाना न सिर्फ सुपरहिट हुआ, बल्कि इसके लिए लता मंगेशकर को दूसरा फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला। इस गाने ने साबित कर दिया कि सुरों की रानी वापस आ चुकी हैं और उनकी आवाज़ पहले से भी ज़्यादा असरदार है।

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इस घटना के बाद लता मंगेशकर ने पहले से ज्यादा सतर्क जीवन जीना शुरू किया। उनका परिवार भी उनकी सेहत और सुरक्षा को लेकर बेहद सावधान रहने लगा। यह किस्सा उनकी ज़िंदगी का सबसे डरावना अध्याय माना जाता है, जिसे उन्होंने बड़े धैर्य और साहस के साथ झेला।

आज जब हम लता मंगेशकर को उनकी पुण्यतिथि पर याद करते हैं, तो सिर्फ उनके गीत ही नहीं, बल्कि उनका संघर्ष और हिम्मत भी हमें प्रेरित करती है। मौत के मुंह से लौटकर भी उन्होंने संगीत को नहीं छोड़ा, बल्कि और भी ऊंचाइयों तक पहुंचाया। यही वजह है कि लता मंगेशकर सिर्फ एक गायिका नहीं, बल्कि भारतीय संगीत की आत्मा मानी जाती हैं।

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