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नौकरी के बदले जमीन केस: लालू परिवार पर आरोप तय होने का फैसला आज

लालू यादव परिवार के लिए आज का दिन अहम, रेलवे नौकरी के बदले जमीन मामले में अदालत सुना सकती है फैसला

Land for job case: राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव तथा उनके परिवार के लिए आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। दिल्ली की एक विशेष अदालत नौकरी के बदले जमीन लेने के कथित घोटाले में आरोप तय करने को लेकर अपना फैसला आज, 4 दिसंबर 2025 को सुना सकती है। मामले से जुड़े सभी पक्षों की नजरें अदालत के निर्णय पर टिकी हुई हैं, क्योंकि फैसला यह तय करेगा कि क्या इस मामले में ट्रायल आगे बढ़ेगा या नहीं।

10 नवंबर को टला था फैसला

इससे पहले, 10 नवंबर को विशेष सीबीआई न्यायाधीश विशाल गोगने ने मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद निर्णय को 4 दिसंबर तक के लिए स्थगित कर दिया था। अदालत आज इस बात पर फैसला देगी कि क्या लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं या नहीं।

क्या है आरोपों का मामला?

यह मामला उस अवधि से जुड़ा है जब लालू प्रसाद यादव 2004 से 2009 तक देश के रेल मंत्री रहे। सीबीआई के अनुसार, इस दौरान रेलवे के पश्चिम मध्य क्षेत्र (जबलपुर, मध्य प्रदेश) में ग्रुप-डी के पदों पर हुई नियुक्तियों के बदले लालू यादव के परिवार या उनके करीबी सहयोगियों के नाम पर जमीन हस्तांतरित कराई गई।

सीबीआई ने अदालत में दायर अपने आरोपपत्र में दावा किया है कि—

  • नियुक्तियां निर्धारित प्रक्रिया और मानदंडों का पालन किए बिना की गईं।
  • कई उम्मीदवारों ने नौकरी मिलने के बाद लालू परिवार से जुड़े व्यक्तियों के नाम पर जमीन का रजिस्ट्री कराया।
  • इन जमीन सौदों में बेनामी लेन-देन शामिल थे, जो आपराधिक कदाचार, धांधली और षड्यंत्र की श्रेणी में आते हैं।
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यह आरोपपत्र न केवल लालू यादव पर बल्कि उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनके पुत्र और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, तथा कुछ अन्य व्यक्तियों पर भी दायर किया गया है।

अभियोजन पक्ष का दावा

सीबीआई का कहना है कि रेलवे में नौकरी पाने वाले अभ्यर्थियों से कथित रूप से जमीन ली गई और वह भी बाजार दर से काफी कम कीमत पर। कई जमीनें पटना के प्रमुख इलाकों में हैं, जिन्हें बाद में राजद नेताओं, उनके सहयोगियों या रिश्तेदारों को हस्तांतरित किया गया।

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एजेंसी ने इन सौदों की संदिग्ध प्रकृति और नियुक्तियों की “अनियमितता” को आधार बनाते हुए आरोप लगाए हैं कि यह पूरा मामला भ्रष्टाचार और आपराधिक षड्यंत्र का एक संगठित उदाहरण है।

लालू यादव और परिवार ने किया आरोपों से इनकार

दूसरी ओर, लालू यादव और उनका परिवार इन आरोपों को पूरी तरह राजनीति से प्रेरित बताते हैं। उनका कहना है कि—

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  • सभी नियुक्तियां नियमों के अनुसार की गई थीं।
  • जमीन सौदों का नौकरी देने से कोई संबंध नहीं है।
  • सभी आरोप विपक्ष द्वारा राजनीतिक लाभ के लिए लगाए गए हैं।

तेजस्वी यादव ने भी कई बार कहा है कि परिवार के खिलाफ यह कार्रवाई “प्रतिशोध की राजनीति” है और अदालत में सच सामने आएगा।

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फैसले पर पूरे देश की नजर

आज अदालत यह तय करेगी कि क्या आरोप तय किए जाएं या नहीं। यदि आरोप तय होते हैं तो मामला ट्रायल चरण में प्रवेश करेगा और लालू परिवार को लंबे कानूनी संघर्ष का सामना करना पड़ सकता है।

यह फैसला बिहार की राजनीति, राजद के भविष्य और लालू परिवार की साख पर भी बड़ा असर डाल सकता है। विपक्ष और सत्तारूढ़ पक्ष—दोनों इस निर्णय पर बारीकी से नज़र रखे हुए हैं।

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