Patna : बिहार में संचालित Kushal Yuva Program (केवाईपी) से जुड़े केंद्र संचालकों ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन की चेतावनी दी है। संचालकों का कहना है कि यदि अगले 48 घंटे के भीतर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो राज्यभर में व्यापक स्तर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा।
केंद्र संचालकों के संगठन KYP Welfare Society ने कहा है कि उनका उद्देश्य किसी योजना को बाधित करना नहीं बल्कि केवाईपी योजना को बचाना और व्यवस्था में सुधार लाना है। इसी उद्देश्य से संचालकों ने “केवाईपी बचाओ आंदोलन” की घोषणा की है और इसके तहत राज्यभर में विरोध मार्च और अन्य कार्यक्रमों की तैयारी की जा रही है।
संचालकों का आरोप है कि बिहार के लगभग 1800 केवाईपी केंद्रों का भुगतान पिछले चार महीनों से लंबित है। भुगतान नहीं मिलने के कारण कई केंद्रों पर कर्मचारियों का वेतन देना, किराया चुकाना, बिजली बिल और अन्य खर्चों का प्रबंधन करना मुश्किल हो गया है। उनका कहना है कि आर्थिक संकट के कारण कई केंद्रों का संचालन प्रभावित हो रहा है और इससे योजना की गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है।
इस बीच युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग का एक पत्र भी सामने आया है, जिसमें स्वीकार किया गया है कि केवाईपी और अन्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों में लंबे समय से भुगतान नहीं होने की शिकायतें मिल रही हैं। विभाग ने माना है कि इससे Bihar Skill Development Mission की छवि प्रभावित हो रही है। पत्र में संबंधित अधिकारियों को लंबित मामलों का जल्द समाधान करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन संचालकों का कहना है कि अब तक स्थिति में कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ है।
केंद्र संचालकों ने बताया कि 23 फरवरी 2026 को उन्होंने 20 सूत्री मांगों का ज्ञापन विभागीय सचिव को सौंपा था। इसमें लंबित भुगतान, प्रशासनिक समस्याओं और प्रशिक्षण केंद्रों से जुड़े कई मुद्दों के समाधान की मांग की गई थी। हालांकि संचालकों का आरोप है कि अब तक इस ज्ञापन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
संचालकों ने साफ तौर पर कहा है कि यदि 48 घंटे के भीतर विभाग की ओर से कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया, तो “केवाईपी बचाओ आंदोलन” को राज्यव्यापी रूप दिया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि इसके बाद होने वाले किसी भी आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी विभागीय अधिकारियों और प्रशासन की होगी।
संचालकों का कहना है कि यदि समस्याओं का समय पर समाधान हो जाता है, तो इससे योजना को मजबूती मिलेगी और युवाओं को कौशल प्रशिक्षण का लाभ भी निर्बाध रूप से मिलता रहेगा।




