पटना पुलिस ने शुक्रवार देर रात पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को एक 31 साल पुराने मामले में गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई पटना के गर्दनीबाग थाना कांड संख्या 552/95 से जुड़ी है, जिसमें एसीजेएम (प्रथम) की अदालत द्वारा उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था। पुलिस इसी वारंट का तामिला कराने आधी रात उनके आवास पर पहुंची और भारी हंगामे के बीच उन्हें हिरासत में लिया।
गिरफ्तारी के बाद पप्पू यादव ने इसे राजनीतिक बदले की भावना से की गई कार्रवाई बताया और अपनी जान पर खतरे की आशंका भी जताई। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, “मैं कोर्ट का सम्मान करता हूं। शनिवार को खुद अदालत में पेश होने वाला था। संसद सत्र के बीच दिल्ली से पटना आया हूं, लेकिन पुलिस जबरन मुझे उठाने आई है। मेरी जान को भी खतरा है।”
पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि पटना में हाल ही में सामने आए नीट छात्रा से दरिंदगी के मामले में वह धरना देने वाले थे। उन्होंने कहा कि इसी विरोध को रोकने के लिए यह पूरी साजिश रची गई है। “मैं परसों छात्रा के समर्थन में बड़ा आंदोलन करने वाला था। उसी से डरकर मुझे रास्ते से हटाने की कोशिश की जा रही है,” उन्होंने कहा।
गिरफ्तारी से पहले उनके आवास पर भारी ड्रामा देखने को मिला। सैकड़ों की संख्या में समर्थक जुट गए और पुलिस को अंदर जाने से रोकने की कोशिश की। समर्थकों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई। स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। काफी मशक्कत के बाद रात करीब 12 बजे पुलिस उन्हें वाहन में बैठाकर आईजीआईएमएस (इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान) ले गई, जहां उनकी चिकित्सकीय जांच कराई गई।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, पप्पू यादव ने यह कहते हुए गिरफ्तारी का विरोध किया कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है और वे खुद शनिवार को कोर्ट में पेश होने वाले थे। हालांकि पुलिस का कहना है कि उनके खिलाफ न्यायालय से जारी वारंट का तामिला करना कानूनन जरूरी था, इसलिए यह कार्रवाई की गई।
रात में मेडिकल जांच के बाद उन्हें कड़ी सुरक्षा में रखा गया है। सूत्रों के अनुसार, शनिवार को उन्हें अदालत में पेश किया जा सकता है। इधर, गिरफ्तारी के विरोध में पप्पू यादव के समर्थक प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं। इसे देखते हुए पुलिस ने पटना और पूर्णिया दोनों जगह सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है।
पप्पू यादव की गिरफ्तारी ने बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल मचा दी है। उनके समर्थकों का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह राजनीतिक दबाव में की गई है, जबकि पुलिस इसे कानूनी प्रक्रिया बता रही है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अदालत में पेशी के बाद आगे की कार्रवाई क्या होती है और इस मामले में पप्पू यादव को राहत मिलती है या नहीं।
इस घटनाक्रम से साफ है कि नीट छात्रा मामले को लेकर बनने जा रहा जनआंदोलन और पप्पू यादव की सक्रिय भूमिका सरकार और प्रशासन के लिए चुनौती बन रही थी, और इसी पृष्ठभूमि में उनकी गिरफ्तारी को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।





