मुजफ्फरपुर में दहेज को लेकर बैंककर्मी बहू का पैर तोड़ा
मुजफ्फरपुर में बैंककर्मी बहू पर ससुराल वालों का कहर; 40 लाख ऐंठने के बाद भी दहेज के लिए तोड़ा पैर

मुजफरपुर के एक गंभीर दहेज उत्पीड़न मामले में एक बैंक अधिकारी महिला ने अपने पति व ससुराल वालों पर शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई है। पीड़िता शुभांगी का कहना है कि शादी के बाद से ही ससुराल वाले लगातार आर्थिक मांग करते रहे और दबाव बनाते रहे।
आवेदन में बताया गया है कि शुभांंगी की शादी 2017 में हुई थी। विवाह के कुछ समय बाद ही ससुराल वालों ने स्थानीय लोगों से लिए गए 40 लाख रुपये के कर्ज का दबाव उन पर डालना शुरू कर दिया। पीड़िता ने शिकायत में कहा है कि संकट से बचने के लिए उन्होंने अपनी तनख्वाह से यह राशि चुकाई। इसके अलावा उन्होंने मायके की जमीन बेचकर भी ससुराल वालों की मांगें पूरी कीं। बावजूद इसके, सास-ससुर व पति की ओर से लगातार अतिरिक्त धनराशि की मांग जारी रही।
शिकायत के अनुसार, ससुराल वालों ने शुभांंगी के नाम पर कई लोन भी करा दिए तथा उनकी कार भी छीन ली गई। जख़्मी होने तक की स्थिति तब आई जब कथित तौर पर ससुराल पक्ष ने पीड़िता का पैर तोड़ दिया। इसके बाद भी उनसे 10-20 लाख रुपये और देने की मांग की जाती रही, जिससे पीड़िता के जीवन और स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ा।
घबरा कर और अपनी जान के भय से पीड़िता ने अंततः महिला थाना में पति समेत चार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। पुलिस ने प्राथमिकी গ্রহণ कर मामले की जांच शुरू कर दी है। स्थानीय थाने के अधिकारी मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सबूत एकत्र करने, मेडिकल रिपोर्ट प्राप्त करने और लोन व संपत्ति के कागजात की जांच कर रहे हैं। पुलिस ने अभी तक सार्वजनिक तौर पर किसी भी गिरफ्तारी की सूचना नहीं दी है।
विधिक विशेषज्ञों के अनुसार यदि प्राथमिकी में बताए गए तथ्य सत्य पाए जाते हैं तो आरोपों में दहेज वज्रन, शारीरिक उत्पीड़न, जबरन वसूली और संबंधित आर्थिक अपराधों की संभावित धाराएँ शामिल हो सकती हैं। पीड़िता ने स्थानीय जागरूकता व महिला कल्याण संस्थाओं से भी मदद मांगी है।
इस किस्से ने न केवल परिवार के टूटते रिश्तों की तस्वीर पेश की है, बल्कि यह भी संकेत दिया है कि आर्थिक दबाव व दहेज की मांग किस तरह जीवन को बर्बाद कर सकती है। पुलिस जांच जारी है और अधिकारी पूरे मामले की गहनता से पड़ताल कर रहे हैं ताकि दोषियों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।




