भाजपा सफल, नीतीश कुमार बिहार से दिल्ली की ओर रवाना’
करीब दो दशक तक बिहार की राजनीति के केंद्र रहे नीतीश कुमार अब राज्यसभा जाने की तैयारी में हैं, जिससे राज्य में नए मुख्यमंत्री को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है।
Bihar Politics : बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव सामने आता दिख रहा है। लंबे समय से राज्य की सत्ता की धुरी बने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब सक्रिय राजनीति में नई भूमिका निभाने की तैयारी कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, वह राज्यसभा के लिए नामांकन करने जा रहे हैं, जिससे बिहार की सत्ता संरचना में बड़ा बदलाव संभव माना जा रहा है।
नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव में एनडीए ने नीतीश कुमार के नेतृत्व में जीत हासिल की थी। उस समय गठबंधन ने उन्हें मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में प्रस्तुत किया था। हालांकि अब वही चेहरा दिल्ली की राजनीति की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। इससे बिहार की सियासत में नए नेतृत्व को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
2005 से 2025 तक का लंबा मुख्यमंत्री सफर
नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर बिहार की राजनीति में बेहद प्रभावशाली रहा है। उन्होंने वर्ष 2005 से 2025 तक विभिन्न राजनीतिक परिस्थितियों में मुख्यमंत्री के रूप में कुल 10 बार शपथ ली।
हालांकि उनकी पहली पारी वर्ष 2000 में शुरू हुई थी, जब वे पहली बार मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन बहुमत की कमी के कारण वह सरकार ज्यादा दिन नहीं चल सकी। इसके बाद 2005 में जब वे दोबारा सत्ता में आए, तो बिहार में विकास, कानून व्यवस्था और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में कई बदलाव देखने को मिले।
इसी दौर में उन्हें “सुशासन बाबू” की पहचान मिली। सड़क, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और प्रशासनिक सुधारों के कारण बिहार की राजनीति में उनका प्रभाव लगातार बना रहा।
भाजपा की रणनीति पर नजर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2014 के बाद से भारतीय जनता पार्टी ने कई बार ऐसे फैसले लिए हैं, जिन्होंने राजनीति में नए समीकरण पैदा किए हैं। कई राज्यों में भाजपा ने अचानक नए चेहरों को मुख्यमंत्री बनाकर सबको चौंकाया है।
इसी कड़ी में बिहार में भी ऐसा ही कोई फैसला सामने आ सकता है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में **नितिन नवीन** को आगे लाने के बाद अब नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चा ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है।
मुख्यमंत्री पद की दौड़ में कई नाम
अगर नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं, तो बिहार में नए मुख्यमंत्री को लेकर कई नाम सामने आ रहे हैं। इनमें भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय राज्यमंत्री नित्यानंद राय का नाम भी चर्चा में है।
इसके अलावा वर्तमान डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को भी मुख्यमंत्री पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा है। भाजपा के पास विधानसभा में मजबूत संख्या होने के कारण उनके नाम पर विचार किया जा सकता है।
कुछ समय पहले भाजपा कोटे से मंत्री श्रेयसी सिंह का नाम भी संभावित चेहरे के रूप में चर्चा में आया था। हालांकि अभी तक किसी नाम पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
चौंकाने वाला फैसला भी संभव
भाजपा की राजनीति को देखते हुए यह भी माना जा रहा है कि पार्टी किसी बिल्कुल नए चेहरे को मुख्यमंत्री बनाकर सबको चौंका सकती है। कई बार भाजपा ने जातीय समीकरण और राजनीतिक रणनीति को ध्यान में रखते हुए अचानक नए नेताओं को आगे बढ़ाया है।
इसलिए यह कहना मुश्किल है कि मुख्यमंत्री पद किसे मिलेगा। फिलहाल पटना से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक बैठकों और रणनीतियों पर सबकी नजर टिकी हुई है।
बिहार की राजनीति में नया अध्याय
नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। करीब दो दशक तक सत्ता के केंद्र में रहने वाले नेता के दिल्ली जाने से राज्य की राजनीति में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया तेज हो सकती है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बिहार की कमान किसे सौंपी जाएगी। आने वाले दिनों में यह फैसला राज्य की राजनीति की दिशा तय करेगा।





