
बिहार में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और पुलिसिंग में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए डीजीपी विनय कुमार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ‘जिला स्तरीय पुलिस रिपोर्ट कार्ड’ तैयार करने का निर्देश दिया है। इस नई व्यवस्था के तहत हर जिले में पुलिस की कार्यप्रणाली, अपराध नियंत्रण, अनुसंधान की गुणवत्ता और थानों के प्रदर्शन का मासिक आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा। गृह मंत्री के साथ उच्च स्तरीय बैठक के बाद डीजीपी ने स्पष्ट कर दिया है कि अब राज्य में जवाबदेही-आधारित पुलिसिंग की शुरुआत हो चुकी है।
मासिक समीक्षा और जवाबदेही का नया सिस्टम
डीजीपी के निर्देशानुसार, हर महीने जिलों की अपराध स्थिति की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। इस समीक्षा में प्रत्येक जिले के एसपी और एसएसपी से सीधे संवाद कर उनके प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा। जो अधिकारी अपने दायित्वों में लापरवाही बरतेंगे, उन पर तुरंत सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह सिस्टम पुलिस विभाग में पारदर्शिता बढ़ाने और नागरिकों को बेहतर सुरक्षा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
थानों के लिए कड़े निर्देश: हर घटना की रिपोर्ट एक सप्ताह में
डीजीपी विनय कुमार ने सभी थानाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि किसी भी आपराधिक घटना की प्रगति रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर अनिवार्य रूप से जमा की जाए। इसके लिए थानाध्यक्षों को पूर्णतः जवाबदेह बनाया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी मामला फाइलों में लंबित न पड़े और जांच समय पर तथा गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरी हो।
संगठित अपराध के खिलाफ बड़ा अभियान
राज्य में संगठित अपराध और गिरोह नेटवर्क को खत्म करने के लिए एटीएस और एसटीएफ का व्यापक विस्तार किया जा रहा है।
- सभी रेंज स्तर पर एटीएस (एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड)
- प्रत्येक जिले में एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स)
इन इकाइयों का गठन अंतिम चरण में है। इन विशेष यूनिटों में केवल वही पुलिसकर्मी शामिल किए जाएंगे जिनका ट्रैक रिकॉर्ड उत्कृष्ट रहा हो और जिन्होंने विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया हो। इसका मकसद राज्य में बढ़ते संगठित अपराध पर तेजी और प्रभावी तरीके से नियंत्रण पाना है।
कमजोर अनुसंधान करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई
डीजीपी ने साफ कहा है कि किसी भी मामले में कमजोर अनुसंधान स्वीकार्य नहीं है। निम्नस्तरीय जांच के लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। डीजीपी ने यह भी निर्देश दिया है कि आरोपियों को साक्ष्य की कमी के कारण जमानत मिलने की स्थिति बिल्कुल नहीं बननी चाहिए, इसलिए अनुसंधान मजबूत और वैज्ञानिक तरीके से किया जाए।
जमानत पर बाहर आए अपराधियों पर कड़ी निगरानी
बिहार पुलिस अब जमानत पर रिहा अपराधियों की गतिविधियों पर भी कड़ी नजर रखेगी। उनकी साप्ताहिक समीक्षा की जाएगी। यदि किसी अपराधी के दोबारा अपराध करने की आशंका या गतिविधि पाई जाती है, तो पुलिस तुरंत उसकी जमानत रद्द कराने का प्रस्ताव अदालत में भेज देगी। यह कदम अपराधियों में भय पैदा करने और अपराध पुनरावृत्ति रोकने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
थानावार अभियान: औपचारिक नहीं, ज़मीनी कार्रवाई ज़रूरी
डीजीपी ने जोर देकर कहा कि थानावार चलाए जा रहे अभियान महज़ औपचारिकताएँ नहीं होने चाहिएं। हर अभियान का लक्ष्य धरातल पर वास्तविक और प्रभावी कार्रवाई होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि केवल कागज़ी कार्यवाही से काम नहीं चलेगा; जनता को परिणाम दिखना चाहिए।
बिहार पुलिस की यह नई पहल राज्य में कानून-व्यवस्था को एक नई दिशा देने वाली है। मासिक रिपोर्ट कार्ड, एटीएस-एसटीएफ का विस्तार, कड़ी निगरानी, त्वरित कार्रवाई और जवाबदेही-आधारित पुलिसिंग से पुलिस व्यवस्था न केवल सुदृढ़ होगी बल्कि अपराध नियंत्रण में भी तेज़ी आएगी। डीजीपी का संदेश साफ है—लापरवाही बर्दाश्त नहीं, और प्रभावी कार्रवाई ही प्राथमिकता।




