बिहार सरकार में पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री सुरेंद्र मेहता (Surendra Mehta) भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं और बछवाड़ा (बेगूसराय) निर्वाचन क्षेत्र से दो बार विधायक रह चुके हैं। मार्च 2024 में वे बिहार के खेल मंत्री बने और 20 नवंबर 2025 को उन्हें पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग सौंपा गया। मेहता धानुक जाति (अत्यंत पिछड़ा वर्ग) से आते हैं। उनके राजनीतिक करियर में लगातार सामाजिक काम और पिछड़ी जातियों के कल्याण पर जोर रहा है।
जन्म और परिवार
सुरेंद्र मेहता का जन्म 5 मई 1959 को बिहार के बेगूसराय जिले के बछवाड़ा क्षेत्र के किरतौल गाँव (वर्तमान में बछवाड़ा विधान सभा क्षेत्र) में हुआ था। उनका मूल परिवार रेलवे में कार्यरत था। उनके पिता पल्लव मेहता भारतीय रेल में तृतीय श्रेणी कर्मचारी के रूप में सेवाश्रित थे। मेहता धानुक जाति से आते हैं, जो बिहार में अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) में गिनी जाती है। इनके जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि ने शुरू से ही उन्हे समाजिक रूप से जोड़े रखा और आगे चलकर पिछड़ी जातियों के लिए काम करने की प्रेरणा दी।
शिक्षा और प्रारंभिक जीवन
सुरेंद्र मेहता ने प्रारंभिक शिक्षा अपने गांव किरतौल और बरौनी के आस-पास पूरी की। उन्होंने 1978 में बरौनी स्थित राधा कृष्ण चमरिया उच्च विद्यालय (फुलवारिया) से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद वे APSM कॉलेज, बरौनी से 1980 में इंटरमीडिएट (बारहवीं कक्षा) की परीक्षा पास कर चुके हैं। इनके बाद formal शिक्षा में इन्हें आगे बढ़ने की सूचना नहीं है, अतः उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई पूर्ण की। कॉलेज के दिनों में सुरेंद्र मेहता विद्यार्थी संघ (AISF) से जुड़े थे और छात्र राजनीति में सक्रियता दिखाते थे।
निजी जीवन
सुरेंद्र मेहता का विवाह हो चुका है और उनकी पत्नी गृहिणी हैं, निजी जीवन में वे साधारण जीवन शैली के समर्थक रहे हैं और सामाजिक कार्यों में रुचि रखते हैं। Chunav Sathi के अनुसार, वे सामाजिक कार्यकर्ता भी रहे हैं। इस कारण उन्हें स्थानीय लोगों के बीच सहज स्वीकार्यता मिली।
राजनीतिक आरंभ
मेहता का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ। वे छात्रावस्था में कम्युनिस्ट पार्टी (AISF, CPI) से जुड़े थे और 2001 में तेघड़ा प्रखंड से जिला परिषद सदस्य का चुनाव जीतकर औपचारिक राजनीति में आए। साल 2005 के बिहार विधानसभा चुनाव के समय उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली और बरौनी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा, जिसमें कुछ मतों के अंतर से हार गए। हार के बावजूद पार्टी कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय रहे और संगठन मजबूत किया। उनके संघर्षपूर्ण आरंभ ने उन्हें पार्टी में मान्यता दिलाई।
विधायक का सफर
सुरेंद्र मेहता 3 बार बिहार विधान सभा के लिए निर्वाचित हुए हैं। पहली बार वे 2010 में बेगूसराय नगर (वर्तमान विधान सभा सं. 108) से भाजपा के टिकट पर जीते थे। उस चुनाव में उन्होंने एनडीए गठबंधन प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की और विधायक बने। 2015 में फिर से उसी क्षेत्र से लड़े, लेकिन कांग्रेस की अमीता भूषण से हार गए। 2020 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें बछवाड़ा से उतारा, जहां उन्होंने निकटतम प्रतिद्वंद्वी सीपीआई के अवधेश राय को केवल 484 वोट से हराकर जीत हासिल की। इस तरह वे दो बार (2010–15 एवं 2020–2025-वर्तमान) विधायक बने। (नोट: 2005 में भी उन्होंने बरौनी सीट से चुनाव लड़ा था, जिसमें हार मिली।) इन चुनाव परिणामों से स्पष्ट है कि उन्होंने संगठन के भरोसे कई बार छोटे अंतर से भी जीत हासिल की।
- विधायी अनुभव: 2010 में बेगूसराय नगर विधायक (जीत), 2015 में हार, 2020-2025 -वर्तमान में बछवाड़ा से विधायक (जीत)।
- निर्वाचित क्षेत्र: बेगूसराय नगर (वर्ष 2010) और बछवाड़ा (2020-2025 -वर्तमान)।
- राजनीतिक पार्टी: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ता रहे।
मंत्री पद और विभाग
सुरेंद्र मेहता को पहली बार 15 मार्च 2024 में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खेल विभाग का मंत्री नियुक्त किया। इस समय तक वे बछवाड़ा विधानसभा से विधायक थे और अपने प्रभावशाली क्षेत्रीय सफर के बाद मंत्रिमंडल में शामिल हुए। खेल मंत्रालय में रहते हुए उन्होंने युवा खेल संरचनाओं को सुधारने, स्थानीय खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने पर ध्यान केंद्रित किया। 20 नवंबर 2025 को बिहार सरकार में उन्हें पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग सौंपा गया। इस प्रकार वे दो अलग-अलग विभागों (खेल मंत्री थे और पशु/मत्स्य) के मंत्री हैं।
- खेल मंत्री (15 मार्च 2024 – 20 नवम्बर 2025): इस दौरान प्रदेश में खेल सुविधाओं को मजबूत करने और खिलाड़ियों के कल्याण की योजनाओं पर काम किया।
- पशु एवं मत्स्य मंत्री (20 नवम्बर 2025 – वर्तमान): इस पद पर अभी-अभी कार्यभार ग्रहण किया है, जहां पशुपालन, मत्स्य पालन संबंधी विकास योजनाओं पर ध्यात्व दिया जाएगा।
संपत्ति एवं हलफनामे
चुनावी हलफनामों में सुरेंद्र मेहता ने अपनी संपत्तियों का खुलासा किया है। वर्ष 2025 के विधान सभा चुनाव के दस्तावेज़ों के अनुसार उनकी कुल चल संपत्ति लगभग ₹97.72 लाख (लगभग 97.7 लाख) है, जबकि देनदारियां करीब ₹9.93 लाख हैं। उनकी सम्पत्ति में मोटर वाहन (एक फॉर्च्यूनर), कुछ बैंक जमा राशि, सोना, नकद आदि शामिल हैं। इससे पूर्व 2020 के हलफनामे में उन्होंने ₹36.68 लाख की संपत्ति और ₹3.53 लाख की देनदारी घोषित की थी। यह पारदर्शिता उनके साफ-सुथरे इरादों को दर्शाती है। उल्लेखनीय है कि सभी निर्वाचन संबंधित स्रोतों में उन्होंने क्रिमिनल या भ्रष्टाचार संबंधी कोई मामला दर्ज नहीं कराया है।
विकास कार्य एवं योजनाएँ
विधायक और मंत्री के रूप में सुरेंद्र मेहता ने अपने निर्वाचन क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता दी है। वे ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाओं के विस्तार, खेल इन्फ्रास्ट्रक्चर और पिछड़े वर्गों के उत्थान पर ध्यान केंद्रित करते रहे हैं। सांसद और अन्य स्थानीय नेताओं के साथ मिलकर बाढ़ नियंत्रण, सड़कों के निर्माण, विद्यालयों और सामुदायिक भवनों की मरम्मत एवं नए निर्माण में योगदान दिया है।
उनके विकास एजेंडे में विशेष रूप से निम्नलिखित मुद्दे शामिल रहे हैं:
- खेल सुविधाएँ: नए खेल मैदान, प्रशिक्षिण केंद्र और खेल सामग्री की व्यवस्था, जिससे ग्रामीण युवाओं को खेल के अवसर मिल सकें।
- सड़क एवं संपर्क: ग्रामीण सड़कों का चौड़ीकरण और उन्नयन, जिससे बाजारों और शहरों से बेहतर कनेक्टिविटी हो सके।
- बाढ़ संरक्षण: बछवाड़ा-बेगूसराय क्षेत्र लगातार बाढ़ ग्रस्त है; इस हेतु अस्थायी बांधों और नालों के जीर्णोद्धार पर काम हुआ है।
- कृषि एवं ग्रामीण कल्याण: किसानों को आधुनिक खेती की तकनीक, बेहतर बीज और सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयास किए गए हैं।
- शिक्षा एवं स्वास्थ्य: नए प्राथमिक विद्यालयों का निर्माण, शिक्षक नियुक्ति और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में डॉक्टर एवं दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित की गयी है।
- महिला एवं युवा सशक्तिकरण: ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार योजनाएं एवं स्किल ट्रेनिंग कार्यशालाएं चलवायीं गई हैं। युवाओं के लिए स्वरोजगार एवं कौशल विकास पर जोर दिया गया है।
- स्वच्छता एवं पर्यावरण: क्षेत्र में साफ-सफाई, पेयजल और पेड़-पौधे लगाने के अभियान चलवाए गए हैं।
इन पहलों से बछवाड़ा इलाके में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जीवन स्तर में धीरे-धीरे सुधार की राह बनी है।
सार्वजनिक छवि और विवाद
सुरेंद्र मेहता की छवि आमतौर पर एक मेहनती, grassroots नेता की रही है, जो पिछड़ी जातियों के मुद्दों पर मुखर हैं। उनके कार्यों से स्थानीय लोगों में विश्वास बढ़ा है। Chunav Sathi के अनुसार वे ईमानदार छवि के राजनेता हैं और बीजेपी के अत्यंत पिछड़े वर्गीकरण (EBC) समुदाय में पार्टी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
हालाँकि, उनके कार्यकाल में कुछ घटनाओं ने विवाद भी खड़े किए। अप्रैल 2025 में बेगूसराय में BJP स्थापना दिवस के अवसर पर उन्होंने लगभग 600 कंबल गर्मी में वितरित कर दिए, जबकि तापमान 32 डिग्री से अधिक था। इस घटना की तस्वीरों से सोशल मीडिया में हलचल मची, लेकिन मेहता ने बाद में सफाई दी कि ये मोटे कंबल नहीं बल्कि पतले चादर हैं जो गरीबों के चटाई के काम आ सकती हैं। उसी वर्ष (अगस्त 2024) दिल्ली के एक कार्यक्रम में खेल मंत्री सुरेंद्र मेहता ने विश्व प्रसिद्ध पहलवान विनेश फोगाट को गलती से बिहार की रहने वाली बताया, जो मीडिया में चर्चा का विषय बनी। इस टिप्पणी पर उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। इन सबके बावजूद, उनके समर्थक इन विवादों को मामूली मानते हुए विकास और सशक्तिकरण के काम की बात करते रहे।
समग्र मूल्यांकन
सुरेंद्र मेहता का राजनीतिक सफर चुनौतियों भरा रहा है, जिसमें हार जीत और जनाक्रोश दोनों सामने आए। उनकी छवि एक सरल, जमीन से जुड़े नेता की बनी है, जिनके संघर्षों ने उन्हें लोकप्रिय बनाया। भाजपा के अत्यंत पिछड़े वर्ग मोर्चे को भी उन्होंने मजबूत किया है। विशेषज्ञों के अनुसार, उनकी उपलब्धियों में पीछे रहने वाले वर्ग के लिए अवसर मुहैया कराना, खेल क्षेत्र को बढ़ावा देना और सामाजिक समरसता की बात शामिल है।
हालांकि उनके सामने अब भी चुनौतियाँ हैं: विस्तृत विकास कार्यों को पूर्णता से लागू करना, राजनीतिक विरोध का सामना करना, और विरोधियों के आरोपों का जवाब देना। कुल मिलाकर सुरेंद्र मेहता की छवि एक कटिबद्ध और अनुभवशील नेता की है, जिनका प्रभाव क्षेत्र और पार्टी संगठन में लगातार बढ़ रहा है। आगामी चुनावों में उनका प्रदर्शन और लोकहित कार्य उनके लोकप्रिय नेतृत्व को और अधिक मापदंडों पर परखेंगे।





