गयाजी से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां नगर प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) राकेश कुमार को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए निगरानी विभाग की टीम ने रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई नगर प्रखंड प्रमुख सुचिता रंजनी की शिकायत पर की गई। गिरफ्तारी के बाद निगरानी की टीम बीडीओ को अपने साथ पटना ले गई है, जहां उनसे आगे की पूछताछ की जा रही है।
मामला 15वीं वित्त आयोग की योजना से जुड़ा हुआ है। जानकारी के अनुसार, नगर प्रखंड के अंतर्गत एक स्कूल की चहारदीवारी निर्माण योजना को पास कराने के एवज में बीडीओ राकेश कुमार ने प्रखंड प्रमुख सुचिता रंजनी से एक लाख रुपये की रिश्वत की मांग की थी। बातचीत के बाद यह रकम किस्तों में देने पर सहमति बनी। तय हुआ कि पहली किस्त के तौर पर 50 हजार रुपये सोमवार को दिए जाएंगे।
प्रमुख सुचिता रंजनी ने इस मांग से आहत होकर सीधे निगरानी विभाग से शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने पूरे मामले का सत्यापन कराया और जाल बिछाने की योजना बनाई। तय समय और स्थान के अनुसार सोमवार की शाम नगर प्रखंड कार्यालय स्थित प्रमुख के चेंबर में बीडीओ को 50 हजार रुपये दिए गए। जैसे ही बीडीओ ने पैसे अपने हाथ में लिए, निगरानी टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें मौके पर ही धर दबोचा।
गिरफ्तारी के बाद पूरे प्रखंड कार्यालय में अफरा-तफरी मच गई। निगरानी की टीम ने बीडीओ राकेश कुमार को हिरासत में लेने के बाद उनके कार्यालय और आवास पर भी तलाशी शुरू कर दी है। टीम दस्तावेजों की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कहीं और भी भ्रष्टाचार से जुड़े सबूत तो नहीं मिलते। साथ ही नकदी, जमीन-जायदाद और अन्य संपत्तियों से संबंधित बिंदुओं की भी पड़ताल की जा रही है।
नगर प्रखंड प्रमुख सुचिता रंजनी ने आरोप लगाया कि यह पहली बार नहीं है जब बीडीओ ने इस तरह की मांग की हो। उन्होंने बताया कि पहले भी योजनाओं की जांच या फाइल आगे बढ़ाने के नाम पर उनसे और अन्य लोगों से पैसे मांगे जाते रहे हैं। उनका कहना है कि बीडीओ का व्यवहार शुरू से ही संदिग्ध रहा है और इस मामले में अन्य कर्मियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
निगरानी विभाग के डीएसपी सत्येंद्र राय ने बताया कि रिश्वत मांगने की शिकायत मिलने के बाद विभाग ने सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए जाल बिछाया। पूरी योजना के तहत बीडीओ को 50 हजार रुपये लेते हुए गिरफ्तार किया गया है। डीएसपी ने स्पष्ट किया कि कुल एक लाख रुपये की मांग की गई थी और यह उसकी पहली किस्त थी।
इस घटना के बाद जिले के प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। लोग इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई मान रहे हैं। फिलहाल निगरानी विभाग आगे की जांच में जुटा है और बीडीओ राकेश कुमार से पूछताछ कर यह पता लगाया जा रहा है कि इस मामले में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।




