घुटनों पर चलता हीरो, 50 स्क्रीन पर रिलीज, 50 लाख कमाने वाली फिल्म
47 साल पहले आई थी ये फिल्म, 50 स्क्रीन पर हुई रिलीज, कमाए 50 लाख, घुटनों में जूते पहनकर चलता था हीरो

भारतीय सिनेमा में कुछ फिल्में और किरदार ऐसे होते हैं, जिन्हें समय बीतने के बाद भी भुलाया नहीं जा सकता। जब हम आज के दौर में सीजीआई और वीएफएक्स से बनी फिल्मों को देखते हैं, तो यह सवाल उठता है कि दशकों पहले बिना आधुनिक तकनीक के कलाकार ऐसे चुनौतीपूर्ण किरदार कैसे निभा लेते थे। ऐसी ही एक ऐतिहासिक फिल्म थी ‘अपूर्वा सगोधरारगल’, जिसमें अभिनेता कमल हासन ने ऐसा किरदार निभाया, जिसने भारतीय सिनेमा में अभिनय की नई मिसाल कायम कर दी।
डबल रोल और अनोखा प्रयोग
यह तमिल फिल्म 14 अप्रैल 1989 को रिलीज हुई थी। फिल्म का निर्देशन संगीतम श्रीनिवास राव ने किया था। कमल हासन इसमें डबल रोल में नजर आए थे। एक किरदार सामान्य कद का था, जबकि दूसरा किरदार एक बौने व्यक्ति का था। यही वह भूमिका थी, जिसने फिल्म को खास बना दिया। उस दौर में न तो वीएफएक्स था और न ही डिजिटल तकनीक, इसके बावजूद कमल हासन ने अपने अभिनय से दर्शकों को यकीन दिला दिया कि वह सच में बौने हैं।
घुटनों में जूते पहनकर निभाया किरदार
बौने के किरदार को निभाने के लिए कमल हासन को पूरी फिल्म में घुटनों के बल चलना पड़ा। इसके लिए खास तरह के जूते और उपकरण तैयार किए गए थे, ताकि उनके पैर पीछे की ओर मुड़े हुए दिखाई दें। टांगों को पीछे बांधकर उन्हें घुटनों के सहारे चलना होता था। डॉक्टरों ने कमल हासन को पहले ही चेतावनी दे दी थी कि ऐसा करने से उनके घुटनों और रीढ़ पर गंभीर असर पड़ सकता है, यहां तक कि वह दोबारा ठीक से चल भी न सकें। इसके बावजूद कमल हासन ने जोखिम उठाया और फिल्म में इस किरदार को निभाया।
सफलता और दर्शकों की प्रतिक्रिया
‘अपूर्वा सगोधरारगल’ ने तमिल सिनेमा में शानदार सफलता हासिल की। यह फिल्म थिएटर में 200 दिनों तक चली और 1989 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली तमिल फिल्म बनी। दर्शकों ने कमल हासन के अभिनय की जमकर तारीफ की। खासकर बौने के किरदार में उनकी मेहनत और भावनात्मक गहराई ने सभी को प्रभावित किया।
हिंदी में बना ‘अप्पू राजा’
फिल्म को बाद में हिंदी में डब किया गया और इसका नाम रखा गया ‘अप्पू राजा’। उत्तर भारत में इसे सिर्फ 50 स्क्रीन पर रिलीज किया गया था। सीमित रिलीज के बावजूद फिल्म ने लगभग 50 लाख रुपये का कारोबार किया। हालांकि हिंदी पट्टी में यह कोई बहुत बड़ी हिट नहीं बन सकी, लेकिन फिल्म के गाने और कमल हासन का अनोखा किरदार दर्शकों को आज भी याद है।
सिनेमा के लिए समर्पण की मिसाल
कमल हासन हमेशा से अपने किरदारों में पूरी तरह डूब जाने के लिए जाने जाते हैं। इस फिल्म में उन्होंने जो जोखिम उठाया, वह उनके समर्पण को दर्शाता है। आज जब कलाकार मेकअप, वीएफएक्स और बॉडी डबल्स की मदद से किरदार निभाते हैं, तब कमल हासन ने शारीरिक तकलीफ और खतरे के बावजूद खुद हर सीन किया।
आज भी प्रेरणा है यह फिल्म
‘अपूर्वा सगोधरारगल’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि अभिनय के प्रति जुनून और ईमानदारी की मिसाल है। इसने यह साबित किया कि सच्चा कलाकार किसी भी चुनौती से पीछे नहीं हटता। यही वजह है कि 35 साल से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी यह फिल्म और कमल हासन का वह किरदार सिनेप्रेमियों के दिलों में जिंदा है।
कमल हासन की यह फिल्म बताती है कि सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि कला और समर्पण का संगम है। यही कारण है कि ‘अपूर्वा सगोधरारगल’ आज भी भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक मील का पत्थर मानी जाती है।




