समस्तीपुर : जिले के सरकारी स्कूलों में संचालित मध्याह्न भोजन योजना (MDM) को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। अब स्कूलों में कार्यरत रसोइया-सह-सहायक से केवल रसोई से जुड़े काम ही कराए जाएंगे। उनसे झाड़ू लगवाने, शौचालय साफ कराने या किसी भी प्रकार का गैर-किचन काम लेने पर संबंधित प्रधानाध्यापक और पदाधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस संबंध में जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) कामेश्वर प्रसाद गुप्ता ने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (BEO) को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि रसोइया-सह-सहायक का मुख्य दायित्व भोजन बनाना, बच्चों को भोजन परोसना और रसोई के बर्तन साफ करना है। इसके अलावा उनसे कोई भी अतिरिक्त कार्य कराना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
डीईओ ने बताया कि हाल के दिनों में कई शिकायतें प्राप्त हुई हैं कि कुछ विद्यालयों में रसोइया-सहायक से स्कूल परिसर और कक्षाओं की सफाई, झाड़ू लगवाना तथा शौचालय साफ करवाया जा रहा है। यह न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि कर्मचारियों के सम्मान और अधिकारों का भी उल्लंघन है।
उन्होंने कहा कि मध्याह्न भोजन योजना का उद्देश्य बच्चों को पोषक आहार उपलब्ध कराना है और इसके लिए रसोइया-सह-सहायक की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। यदि उनसे गैर-जरूरी काम कराए जाएंगे तो इससे योजना की गुणवत्ता पर भी असर पड़ेगा।
शिक्षा विभाग ने सभी प्रधानाध्यापकों को चेतावनी दी है कि वे अपने विद्यालयों में कार्यरत रसोइया-सह-सहायक से सिर्फ रसोई संबंधी कार्य ही लें। यदि कहीं से भी शिकायत मिली या निरीक्षण में गड़बड़ी पाई गई तो संबंधित स्कूल प्रबंधन और अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
डीईओ ने यह भी कहा कि बच्चों को स्वच्छ, सुरक्षित और समय पर भोजन उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।



