
झंझारपुर (मधुबनी) : कन्दर्पीघाट स्थित ऐतिहासिक मिथिला विजय स्तंभ पर कन्दर्पीघाट युद्ध के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन शिम्मर फाउंडेशन के तत्वावधान में मंगलवार को हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी, साहित्यकार, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक शामिल हुए।
कार्यक्रम का शुभारंभ मिथिला विजय स्तंभ पर दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद उपस्थित अतिथियों और नागरिकों ने वीर शहीदों को श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। “जय-जय भैरवी” के सामूहिक गान से पूरा वातावरण वीर-रस और श्रद्धा से ओतप्रोत हो उठा। इस अवसर पर वक्ताओं ने कन्दर्पीघाट युद्ध के ऐतिहासिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
मुख्य अतिथि झंझारपुर के पूर्व अनुमंडल पदाधिकारी डॉ. रंगनाथ चौधरी ने कहा कि कन्दर्पीघाट का युद्ध केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि मिथिला के स्वाभिमान, एकता और आत्मसम्मान का जीवंत इतिहास है। उन्होंने कहा कि यह विजय स्तंभ आने वाली पीढ़ियों को अपने गौरवशाली अतीत से जोड़ने का कार्य करता है और युवाओं को अपने इतिहास से प्रेरणा लेने की सीख देता है।
शिम्मर फाउंडेशन के सचिव सुमित सुमन ने कहा कि संस्था का उद्देश्य मिथिला के वीर इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को जन-जन तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि कन्दर्पीघाट के अमर शहीदों का बलिदान हमें अपने मूल्यों, परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए निरंतर प्रेरित करता रहेगा।
कार्यक्रम का संचालन आनंद मोहन झा ने किया, जबकि अध्यक्षता प्रो. विद्यनाथ झा ने की। समारोह में पं. जगदीश मिश्र, प्रो. विद्यनाथ झा, योगानंद झा, फूल सिंह, स्वर्णिम किरण झा ‘प्रेरणा’, रेखा चौधरी, डॉ. कृष्ण मुरारी झा, डॉ. श्रीशंकर झा, अमल झा, अनुराग मिश्रा, निधि कुमारी, नारायण यादव, उदय शंकर मिश्रा, काशीनाथ झा ‘किरण’ सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में सभी ने अमर शहीदों की स्मृति को नमन करते हुए उनके आदर्शों पर चलने और मिथिला की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। पूरा आयोजन श्रद्धा, गौरव और प्रेरणा का संदेश देता नजर आया।




