विश्व हिंदी दिवस 2026: इतिहास, उद्देश्य एवं वैश्विक गतिविधियाँ
विश्व हिंदी दिवस (World Hindi Day) प्रतिवर्ष 10 जनवरी को मनाया जाता है। यह दिवस हिंदी भाषा को विश्वभर में बढ़ावा देने और हिंदी को एक अंतरराष्ट्रीय भाषा के रूप में प्रस्तुत करने के उद्देश्य से मनाया जाता है। इस अवसर पर भारत सरकार, विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावास और देश-विदेश के शिक्षण संस्थान विविध कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। इस दिवस की स्थापना 10 जनवरी 1975 को नागपुर (महाराष्ट्र) में हुए पहले विश्व हिंदी सम्मेलन को यादगार बनाने के लिए हुई थी, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस सम्मेलन का उद्घाटन किया था। उसके बाद वर्ष 2006 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी को औपचारिक रूप से ‘विश्व हिंदी दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा की थी। तब से प्रत्येक वर्ष इसी तिथि को विश्व हिंदी दिवस बड़े उत्साह से मनाया जाता है।
विश्व हिंदी दिवस का इतिहास और महत्व
विश्व हिंदी दिवस की जड़ें 1975 के प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन से हैं। 10 जनवरी 1975 को नागपुर में आयोजित इस सम्मेलन का उद्देश्य हिंदी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाना था, जिसमें 30 देशों के 122 प्रतिनिधि शामिल हुए थे। इस ऐतिहासिक आयोजन को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उद्घाटन कर विश्वभर में हिंदी के महत्व को रेखांकित किया था। हालांकि, हिंदी के प्रति जागरूकता फैलाने और इसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने के लिए इसे दिवस के रूप में घोषित करना बाद में ही संभव हुआ।
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वर्ष 2006 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने घोषणा की कि प्रति वर्ष 10 जनवरी को ‘विश्व हिंदी दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा। तब से विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास इस दिन को विशेष रूप से कार्यक्रमों के साथ मनाने लगे। इसका प्रमुख उद्देश्य हिंदी भाषा की वैश्विक प्रसार-प्रसार की भावना को जगाना और विश्वभर में हिंदी प्रेमियों को एक सूत्र में पिरोना है।
विश्व हिंदी दिवस का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह हमें यह याद दिलाता है कि हिंदी सिर्फ भारत की भाषा नहीं है, बल्कि आज दुनिया भर के अनेक देशों में बोली और समझी जाती है। जैसा कि टाइम्स नाउ ने लिखा है, “आज देश ही नहीं, पूरी दुनिया में विश्व हिंदी दिवस 2026 मनाया जा रहा है। हिंदी अब केवल भारत की भाषा नहीं रही बल्कि कई देशों में इसे बोला और समझा जाता है।” विश्व हिंदी दिवस भारतीयों में भाषा के प्रति गर्व की भावना को जगाता है और हमें हमारी सांस्कृतिक और भावनात्मक पहचान से जोड़ता है।
इतिहास के मुख्य पड़ाव
विश्व हिंदी दिवस से जुड़ी प्रमुख तिथियाँ और घटनाएँ इस प्रकार हैं:
- 10 जनवरी 1975: नागपुर (महाराष्ट्र) में प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन आयोजित हुआ, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने किया।
- 14 सितंबर 1949: (दूसरे दिनांक के लिए संदर्भ) स्वतंत्र भारत की संविधान सभा ने हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया। इसीलिए हर साल 14 सितंबर को ‘राष्ट्रीय हिंदी दिवस’ भी मनाया जाता है, जो हिंदी दिवस (Hindi Diwas) के नाम से जाना जाता है।
- 10 जनवरी 2006: तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने घोषणा की कि यह दिन प्रतिवर्ष ‘विश्व हिंदी दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा।
- प्रत्येक वर्ष 10 जनवरी: विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर विश्वभर में अनेक कार्यक्रम आयोजित होते हैं, जिन्हें भारतीय दूतावास, विदेश में बसी भारतीय छात्र-युवा, हिंदी साहित्यिक समुदाय आदि मिलकर मनाते हैं।
लगभग हर वर्ष विदेशों के विश्वविद्यालयों में हिंदी भाषण प्रतियोगिताएँ, निबंध-लेखन एवं चित्रकला प्रतियोगिताएँ, कवि सम्मेलन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं ताकि हिंदी के प्रति जागरूकता बढ़े।
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2026 की थीम और विशेषताएँ
हर विश्व हिंदी दिवस की एक विशिष्ट थीम भी होती है, जो हिंदी भाषा के विकास या उपयोग को दर्शाती है। वर्ष 2026 के लिए इस दिवस की थीम रखी गई है “हिंदी: पारंपरिक ज्ञान से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक”। इस थीम का उद्देश्य यह दिखाना है कि हिंदी न केवल एक समृद्ध सांस्कृतिक और साहित्यिक भाषा है, बल्कि तकनीक और नवप्रवर्तन के क्षेत्र में भी तेजी से अपनी जगह बना रही है। उदाहरण के लिए, आज के डिजिटल युग में हिंदी में कम्प्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, गेमिंग और सोशल मीडिया पर अनुसंधान और विकास हो रहा है। सरकार भी हिंदी को कोडिंग, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और नई तकनीकों के साथ संगत बनाने के प्रयासों को बढ़ावा दे रही है।
2025 में विश्व हिंदी दिवस की थीम थी “एकता और सांस्कृतिक गौरव की वैश्विक आवाज”, और 2024 में “हिंदी लिपि सुघड़, युवा सशक्त” जैसी प्रासंगिक थीम रखी गई थीं। इन थीमों के माध्यम से हिंदी को आधुनिक संदर्भ में जोडते हुए शिक्षा, तकनीक और युवा वर्ग में इसकी भूमिका को रेखांकित किया गया। 2026 की थीम विशेष रूप से इस बात पर बल देती है कि कैसे परंपरागत ज्ञान (ज्ञानशास्त्र, साहित्य, दर्शन) से लेकर उच्च तकनीकी क्षेत्रों (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल मीडिया) तक हिंदी ने अपना विकास किया है।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व
विश्व हिंदी दिवस का उद्देश्य मुख्य रूप से हिंदी के वैश्विक प्रसार को बढ़ावा देना है। इसे भारत के साथ ही विदेशों में बसे भारतीयों और हिंदी प्रेमियों को एक सूत्र में बांधने का दिवस भी कहा जाता है। हिंदी भाषा भारतीयता की पहचान है, और विश्व हिंदी दिवस हमें यह संकल्प लेने की प्रेरणा देता है कि हम हिंदी को दुनिया के कोने-कोने में पहुंचाएंगे।
विकसित दुनिया में हिंदी की बढ़ती पहचान के संकेत भी मिलते हैं। “हिंदी अब केवल भारत की भाषा नहीं रही, बल्कि कई देशों में इसे बोला और समझा जाता है,” यह भावना टाइम्स नाउ के विशेष लेख में व्यक्त की गई है। वास्तव में, आज दुनिया के लगभग 100 से अधिक देशों में हिंदी पढ़ाई और बोली जाती है। विदेश राज्यमंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि विश्वभर में लगभग 100 देशों के 670 विश्वविद्यालयों, शिक्षण संस्थाओं और विद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जा रही है। इसके अतिरिक्त, भारत के 37 पासपोर्ट कार्यालयों में से 22 कार्यालयों में 70% से अधिक कार्य हिंदी में हो रहे हैं। इन आंकड़ों से पता चलता है कि हिंदी का प्रसार निरंतर बढ़ रहा है।
मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने इस अवसर पर गर्व प्रकट किया कि “हिंदी भारत में ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर मानवता को एक सूत्र में पिरोने वाली सेतु भाषा बन रही है।” उनके अनुसार, विदेश में राजनयिकों द्वारा हिंदी में नववर्ष की शुभकामनाएं देना और अंतरराष्ट्रीय छात्र-विद्यार्थियों द्वारा हिंदी गीतों की प्रस्तुतियाँ भाषा की वैश्विक आत्मा को जिंदा कर रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय संस्कृति और विरासत को दुनिया भर में फैलाने में हिंदी एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विश्व हिंदी दिवस पर संदेश में कहा कि प्रवासी भारतीय हिंदी भाषा के “राजदूत” हैं और भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव से दुनिया में हिंदी के प्रति रुचि बढ़ी है। उनके अनुसार, भारत की प्रगति एवं संस्कृति के प्रसार के कारण अब विश्व की कई जनसंख्या को हिंदी में संवाद करते और समझते देखना गर्व की बात है। विदेशों में आयोजित कार्यक्रमों में उन्होंने प्रसन्नता जताई कि विश्व के कई हिस्सों में अनेक कार्यक्रम आयोजित होकर हिंदी को मान्यता और लोकप्रियता मिल रही है।
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विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर गतिविधियाँ
विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर देश-विदेश में अनेक गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं। भारत सरकार और भारतीय विदेश मंत्रालय के तहत काम करने वाले भारतीय दूतावास, सांस्कृतिक संगठनों (जैसे ICCR) तथा स्थानीय हिंदी संस्थानों द्वारा कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। उदहारण के लिए:
- भारत में आयोजन: दिल्ली, भोपाल, मुंबई, कोलकाता जैसे महानगरों में हिन्दी भाषा व साहित्य पर परिचर्चाएँ, संगोष्ठियाँ, कवि सम्मेलन, वाद-विवाद एवं निबंध प्रतियोगिताएँ आयोजित होते हैं। हिन्दी विभाग वाले विश्वविद्यालयों में सेमिनार और शिक्षण कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं।
- विदेशों में आयोजन: भारतीय दूतावास (एम्बेसी) और वाणिज्य दूतावास दुनियाभर में हिंदी दिवस पर संस्कृतिक कार्यक्रम करते हैं। उदाहरण के लिए, चाड, ब्राजीलिया, अमेरिका आदि देशों में 2026 में भी कवि सम्मेलनों, गायन एवं नृत्य कार्यक्रमों के माध्यम से हिंदी दिवस मनाया गया। भारतीय छात्रों और स्थानीय समुदाय को एकत्र करके “वन्दे मातरम्” गायन, हिन्दी भाषण-प्रतियोगिता, छायाचित्र प्रदर्शनी इत्यादि जैसी गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं।
- शिक्षण संस्थान: विश्व के कई विश्वविद्यालयों में हिंदी शिक्षण केंद्र हैं, जहां 10 जनवरी के पास विशेष कक्षाएं और कार्यक्रम होते हैं। इनमें हिंदी भाषा की महत्ता, साहित्यिक सांस्कृतिक योगदान पर व्याख्यान दिए जाते हैं। कई विदेशों में रहते भारतीय छात्र भी अपनी मातृभाषा से जुड़े रहने के लिए इस दिन विशेष पहल करते हैं।
- डिजिटल अभियान: सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर #WorldHindiDay जैसे हैशटैग के साथ प्रचार-प्रसार होता है। विभिन्न मीडिया संस्थान, रेडियो, टीवी चैनल हिंदी दिवस विशेष संचार करते हैं। कई समाचार-पत्र, वेबसाइट, और यूट्यूब चैनल इस दिन हिंदी के प्रसार पर लेख, वीडियो प्रसारित करते हैं।
अन्य उदाहरण के तौर पर 2026 में हुआ “प्रवासी भारतीय दिवस एवं विश्व हिंदी दिवस” जैसा आयोजन गयाना (Guyana) में भी हुआ, जहां हिंदी कविता पाठ, नाट्य-प्रस्तुति और शैक्षिक सत्र आयोजित किए गए। इसी तरह, अमेरिका के विभिन्न शहरों में भारतीय स्टूडेंट्स और समुदायों ने हिंदी भाषा दिवस समारोह मनाए। इन आयोजनों के माध्यम से हिंदी को राष्ट्रीय-सांस्कृतिक धरोहर के रूप में उजागर करने के साथ-साथ विदेशी मित्रों को भी हिंदी भाषा की खूबसूरती से अवगत कराया जाता है।
विश्व हिंदी दिवस के मौके पर हाल ही में नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय के कार्यक्रम में कीर्ति वर्धन सिंह ने संबोधित करते हुए कहा कि “हिंदी सिर्फ देश की सांस्कृतिक पहचान ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करने का एक शक्तिशाली माध्यम भी बन रही है”। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश भी पढ़ा गया, जिसमें उन्होंने प्रवासी भारतीयों को हिंदी के राजदूत बताया।
विश्व हिंदी दिवस 2026 की विशेषताएँ
2026 का विश्व हिंदी दिवस कुछ विशेष कार्यक्रमों के साथ मनाया गया। देश-विदेश में हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक हस्तियों ने भी शुभकामनाएँ दीं और भाषण दिए। केंद्र और राज्य सरकारों ने सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर हिंदी की डिस्ट्रीब्यूशन बढ़ाई। साथ ही इस दिन प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री स्तर पर हिंदी की उपलब्धियों और महत्व पर बल देने वाले संदेश दिए गए।
बहुत सी कंपनियों ने अपने इंटरफ़ेस या वेबसाइट में हिंदी भाषा को महत्व देते हुए न्यू सोशल मीडिया कैम्पेन भी चलाए। उदाहरणार्थ, शिक्षा मंत्रालय और प्रसार भारती द्वारा हिंदी शिक्षा और हिंदी सिनेमा के महत्व पर विशेष कार्यक्रम प्रसारित किए गए। कुल मिलाकर, 2026 में विश्व हिंदी दिवस पर गतिविधियाँ ऐतिहासिक दृष्टि और भावनात्मक दृष्टिकोण से भरपूर रहीं, जिससे विश्वभर में हिंदी के प्रति गौरव की भावना और जागरूकता दोनों बढ़ीं।
उद्धरण और संदेश
विश्व हिंदी दिवस के मौके पर अक्सर कई प्रेरणादायक उद्धरण और संदेश भी साझा किए जाते हैं। इनमें कई लोकप्रियोह रचनाएँ और विचार शामिल होते हैं जो हिंदी की महिमा गाते हैं। उदाहरण के लिए:
“हिंदुस्तानी हैं हम और हिंदी हमारी जुबान है।” – यह पंक्तियाँ हमें याद दिलाती हैं कि हिंदी हमारी सांझी भाषा और आत्म-अभिमान की अभिव्यक्ति है।
“हिंदी भारत में ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर मानवता को एक सूत्र में पिरोने वाली सेतु भाषा बन रही है।” – विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह का यह कथन हिंदी की वैश्विक स्वीकार्यता पर प्रकाश डालता है।
“अगर भारत का करना है उत्थान तो हिंदी को अपनाना होगा, अंग्रेज़ी को ‘विषय मात्र’ और हिंदी को ‘अनिवार्य’ बनाना होगा।” – यह उदाहरणात्मक पंक्तियाँ हिंदी के महत्व की ओर इशारा करती हैं।
“भारत की एकता और अखंडता ही हमारे देश की पहचान है, हिंदुस्तानी हैं हम और हिंदी हमारी जुबान है।” – हिंदी को हमारी पहचान बताते हुए ये पंक्तियाँ भावनात्मक ऊर्जा भर देती हैं।
ये उद्धरण न सिर्फ भाषा के महत्त्व को रेखांकित करते हैं, बल्कि लोगों में भाषा के प्रति अनुराग भी जगाते हैं। विश्व हिंदी दिवस पर ऐसी पंक्तियाँ और संदेश सोशल मीडिया, समाचार पत्रों और कार्यक्रमों में व्यापक रूप से साझा किए जाते हैं।
हिंदी का भावनात्मक और सांस्कृतिक महत्त्व
हिंदी केवल संवाद का माध्यम ही नहीं, हमारी संस्कृति, परंपरा और भावनाओं का भी वाहक है। यह वह भाषा है जिसमें लोकगीत, लोककथाएँ, पुरानी विरासत और आधुनिक गीत-साहित्य सभी शामिल हैं। विश्व हिंदी दिवस हमें याद दिलाता है कि हमें अपनी मातृभाषा पर गर्व होना चाहिए और उसे संरक्षित-संवर्धित करने में योगदान देना चाहिए।
भाषा को राष्ट्र की आत्मा कहा जाता है। जैसा कि कई विद्वान कहते हैं: “भाषा राष्ट्र का जीवन है।” हिंदी ने भारत की विविधताओं को एक सूत्र में पिरोकर हमें जोड़ने का काम किया है। आज हम सोशल मीडिया पर भी हिंदी का व्यापक उपयोग करते हैं – चाहे वह साहित्यिक चर्चा हो या आम आदमी की बात। डिजिटल एज में भी हिंदी ने अपनी जगह बनाई है।
विश्व हिंदी दिवस हमें यह संकल्प लेने की प्रेरणा देता है कि हम हिंदी को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाएँगें। चाहे बोलचाल हो या पढ़ाई-लिखाई, सरकारी काम हो या निजी संचार, हिंदी का प्रयोग बढ़ने से हमारी सांस्कृतिक जड़ें मजबूत होंगी। 10 जनवरी को मनाया जाने वाला यह दिवस हमें हमारी भाषा के प्रति कृतज्ञ होने और हिंदी प्रेमियों से जुड़ने का अवसर भी देता है।
हर भारतीय, विशेषकर युवा वर्ग, को चाहिए कि वे विश्व हिंदी दिवस पर हिंदी सिनेमा, संगीत, साहित्य और तकनीकी विकास में हिंदी के योगदान को याद करें। संयुक्त रूप से हम इस भाषा को और समृद्ध कर सकते हैं और इसे विश्वस्तर पर पहचान दिला सकते हैं।
विश्व हिंदी दिवस की वर्षगाँठ हमें यह एहसास कराती है कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, अपितु हमारी आत्मा और संस्कृति का दर्पण है। इतिहास में हिंदी ने विविधता में एकता का संदेश दिया है और आज भी जब हम हिंदी बोलते हैं, लिखते हैं और लिखवाते हैं, हम अपनी पहचान को सुदृढ़ करते हैं।
2026 का विश्व हिंदी दिवस पारंपरिक ज्ञान से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक की यात्रा को समर्पित था, और इसने यह दिखाया कि हिंदी पुराने और नए दोनों संसार में अपना योगदान दे रही है। विश्वभर में हिंदी दिवस पर हुए आयोजन और संदेश इस बात के द्योतक हैं कि हिंदी बढ़ती वैश्विक पहचान में हमारी अहम भूमिका निभा रही है।
जैसे ही हम अगले विश्व हिंदी दिवस का इंतज़ार करेंगे, हम गर्व से कह सकते हैं: “भाषा हमारी जान है, हिंदी हमारे सम्मान की शान है।” आईए, अपने ‘गाम-घर’ और दुनिया में हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में योगदान दें और इसे सर्वत्र मान्य बनाएं।



