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रोहिणी आचार्य : “हर बेटी का मायके पर हक, बिना डर-शर्म के लौट सके”

रोहिणी आचार्य का इमोशनल पोस्ट: “हर बेटी का मायके पर हक, बिना डर-शर्म के लौट सके” — बिहार की राजनीति और पितृसत्ता पर बड़ा सवाल

Gaam Ghar : राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य (Rohini Acharya) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक बेहद भावुक और विचारोत्तेजक पोस्ट किया है। इस पोस्ट में उन्होंने बेटियों के मायके में अधिकार, सम्मान और सुरक्षा को लेकर समाज और प्रशासन दोनों पर गहरे सवाल उठाए हैं। रोहिणी ने कहा कि बिहार में पितृसत्तात्मक मानसिकता इतनी गहरी जड़ें जमा चुकी है कि अब सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर बड़े बदलाव की जरूरत है।

“बेटी को मायके लौटने का हक बिना डर, शर्म और अपराधबोध के मिलना चाहिए”

अपने पोस्ट में रोहिणी आचार्य ने लिखा—

“हर बेटी को इस आश्वासन के साथ बड़े होने का अधिकार है कि उसका मायका एक ऐसा सुरक्षित स्थान है, जहां वह बिना किसी डर, अपराधबोध, शर्म या किसी को कोई स्पष्टीकरण दिए बिना लौट सकती है।”

रोहिणी ने कहा कि इसका क्रियान्वयन केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि महिलाओं को भविष्य में होने वाले शोषण और उत्पीड़न से बचाने का महत्वपूर्ण कदम है।

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उन्होंने पितृसत्ता को बिहार के सामाजिक और राजनीतिक दोनों ही ढांचों के केंद्र में माना और कहा कि इसे बदलने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है।

पारिवारिक विवाद और राजनीति से दूरी

बिहार विधानसभा चुनाव में राजद (RJD) की करारी हार के बाद रोहिणी और तेजस्वी यादव के बीच तनाव सामने आया था। विवाद के बाद रोहिणी रात में ही अपना मायका (राबड़ी आवास) छोड़कर निकल गई थीं।
15 नवंबर को दोपहर 2:52 बजे रोहिणी ने X पर पोस्ट कर लिखा—

“मैं राजनीति छोड़ रही हूं और अपने परिवार से नाता तोड़ रही हूं… संजय यादव और रमीज ने मुझसे यही करने को कहा था और मैं सारा दोष अपने ऊपर ले रही हूं।”

यह पोस्ट राजनीतिक गलियारों में बड़ी चर्चा का विषय बना और रोहिणी के इस कदम को परिवार के भीतर चल रहे तनाव की कड़ी के रूप में देखा गया।

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तेज प्रताप पहले ही पार्टी और परिवार से निकाले जा चुके हैं

रोहिणी के इस कदम से पहले 25 मई को लालू प्रसाद यादव ने अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को पार्टी और परिवार दोनों से बाहर कर दिया था।
तेज प्रताप ने इसके लिए भी सलाहकार संजय यादव को जिम्मेदार ठहराया था।
अब रोहिणी का यह कदम पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के भीतर चल रही खींचतान को और स्पष्ट करता है।

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RJD की हार और बढ़ता राजनीतिक तनाव

ताज़ा विधानसभा चुनाव परिणामों में RJD को महज 25 सीटें मिली हैं, जबकि 2020 में पार्टी ने 75 सीटें जीती थीं।
तेज प्रताप यादव इस चुनाव में करीब 50,000 वोटों से हार गए, जबकि तेजस्वी यादव ने लंबी जद्दोजहद के बाद मुश्किल से अपनी सीट बचाई।

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पार्टी की इस भारी हार के बाद RJD में आंतरिक असंतोष खुलकर सामने आता दिखाई दे रहा है —
एक तरफ तेज प्रताप को परिवार से निकाला गया, दूसरी तरफ अब रोहिणी ने भी राजनीति और परिवार से दूरी बनाने की घोषणा कर दी है।

समाज और राजनीति को आईना दिखाता रोहिणी का पोस्ट

रोहिणी का यह पोस्ट सिर्फ व्यक्तिगत पीड़ा का बयान नहीं, बल्कि बिहार की सामाजिक संरचना पर तीखी टिप्पणी है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब एक बेटी अपने ही घर — अपने मायके — में सुरक्षित महसूस नहीं करती, तो समाज में महिलाओं के अधिकारों की स्थिति कितनी कमजोर है।

उनका संदेश स्पष्ट है:
बेटियाँ कोई बोझ नहीं, उनका मायका उनका अधिकार है — सम्मान के साथ, बिना डर और बिना किसी शर्म के।

यह पोस्ट बिहार की राजनीति, परिवारवाद और महिला सुरक्षा पर एक बड़ी बहस को जन्म दे चुका है।

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