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समस्तीपुर में बायो मेडिकल वेस्ट खुले में फेंकने से स्वास्थ्य-पर्यावरण संकट बढ़ा

समस्तीपुर में बायो मेडिकल कचरे का खुला निस्तारण, स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए खतरा

(सांकेतिक फोटो)

समस्तीपुर : जिले में अस्पतालों और नर्सिंग होम से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट का उचित प्रबंधन न होने के कारण यह गंभीर स्वास्थ्य और पर्यावरण संकट बन गया है। जांच में पाया गया कि कई अस्पताल और पैथोलॉजी लैब अपने चिकित्सा कचरे को वैज्ञानिक तरीके से नष्ट करने के बजाय खुले मैदानों, सड़क किनारे, नालों या सामान्य कचरे के साथ फेंक रहे हैं। इससे स्थानीय लोगों को बीमार होने का खतरा बढ़ रहा है और जल, थल एवं वायु प्रदूषण की स्थिति गंभीर होती जा रही है।

विशेषकर ब्लड से सने कॉटन, यूज़्ड ब्लेड, सिरिंज, ग्लव्स, सैम्पल ट्यूब, प्लास्टिक कैनुला, लैब टेस्टिंग कचरा और संक्रमित बैंडेज जैसी सामग्री खुले में फेंकी जा रही है। बारिश, धूप और हवा के संपर्क में आने से यह और अधिक खतरनाक हो जाता है। शहर में प्रतिदिन सैकड़ों किलो बायो मेडिकल कचरा उत्पन्न होता है, जिसे सुरक्षित नष्ट करने के बजाय लापरवाही से बाहर फेंक दिया जा रहा है। कई अस्पतालों ने अधिकृत वेस्ट डिस्पोजल एजेंसी से अनुबंध तक नहीं किया है, जिससे स्थिति और भयावह हो गई है।

खुले में पड़े इस खतरनाक कचरे के कारण आसपास के इलाकों में दुर्गंध फैल रही है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह विशेष रूप से खतरनाक है। गलती से इस कचरे के संपर्क में आने पर संक्रमण फैलने की संभावना अत्यधिक बढ़ जाती है। कई जगहों पर जानवर भी कचरे को फैला देते हैं, जिससे इलाके की सफाई और स्वास्थ्य स्थिति और खराब होती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बायो मेडिकल वेस्ट में विषैले तत्व और खतरनाक सूक्ष्मजीव होते हैं। यह मिट्टी, जल और हवा को प्रदूषित करता है। संक्रमित सुई, ब्लेड और खून से सनी सामग्री के संपर्क में आने से एचआईवी, हेपेटाइटिस बी एवं सी, त्वचा संक्रमण, टेटनस, टीबी और विभिन्न वायरल इंफेक्शन फैल सकते हैं। ये संक्रमण कभी-कभी जानलेवा भी साबित हो सकते हैं।

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सरकारी नियमों के अनुसार, हर अस्पताल और नर्सिंग होम को बायो मेडिकल वेस्ट के संग्रहण, परिवहन और वैज्ञानिक निस्तारण की सुनिश्चित व्यवस्था करनी होती है। इसके साथ ही प्रतिदिन वेस्ट डिस्पोजल की रिपोर्ट और रिकॉर्ड रखना अनिवार्य है। बावजूद इसके, जिले के कई संस्थान इन नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की निगरानी प्रणाली भी सुस्त पड़ी हुई है, जिससे अनियमितताएं लगातार बढ़ रही हैं।

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स्थानीय लोग, सामाजिक संगठन और पर्यावरण कार्यकर्ता जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि लापरवाह अस्पतालों पर भारी जुर्माना लगाया जाए, अनुबंध रहित संस्थानों के लाइसेंस रद्द किए जाएं और शहर में बायो मेडिकल वेस्ट के वैज्ञानिक निस्तारण को अनिवार्य रूप से लागू किया जाए।

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डॉ. एसके चौधरी, सिविल सर्जन, समस्तीपुर ने कहा कि बायो मेडिकल वेस्ट को खुले में फेंकना गंभीर अपराध है। सभी अस्पतालों को नियमों के तहत कचरे का वैज्ञानिक निष्पादन करना अनिवार्य है। निरीक्षण के निर्देश जारी कर दिए गए हैं और जहां भी अनियमितता मिलेगी, उन अस्पतालों पर नोटिस और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

समस्तीपुर में बायो मेडिकल कचरे का खुला निस्तारण एक गंभीर समस्या बन गई है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को तुरंत प्रभावी कदम उठाकर इस खतरे को कम करना होगा। वैज्ञानिक तरीके से कचरे के निष्पादन और नियमों का पालन ही स्थानीय स्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है।

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