ग्रामीण भारत में जलवायु समाधान के लिए नाबार्ड का क्लाइमेट स्टैक चैलेंज’
गेट्स फाउंडेशन और डालबर्ग के सहयोग से शुरू पहल, ग्रामीण भारत में जलवायु जोखिम पूर्वानुमान और कृषि समाधान विकसित करने के लिए इनोवेटर्स से आवेदन आमंत्रित।

ग्रामीण भारत को जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों से सुरक्षित और सक्षम बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने एक नई पहल की शुरुआत की है। नाबार्ड ने गेट्स फाउंडेशन और डालबर्ग एडवाइजर्स के सहयोग से नेशनल क्लाइमेट स्टैक इनोवेशन चैलेंज लॉन्च किया है। यह राष्ट्रीय स्तर की पहल है, जिसका मकसद ग्रामीण क्षेत्रों के लिए जलवायु से जुड़े डेटा और जोखिम पूर्वानुमान को एकीकृत करते हुए तकनीकी समाधान विकसित करना है।
इस इनोवेशन चैलेंज के लिए आवेदन 6 मार्च 2026 से इनोवेटर्स, स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों के लिए खोल दिए गए हैं। चयनित प्रतिभागियों को जलवायु से जुड़े जोखिमों का बेहतर पूर्वानुमान लगाने और किसानों को व्यावहारिक समाधान उपलब्ध कराने के लिए मॉडल और डिजिटल डैशबोर्ड विकसित करने का अवसर मिलेगा।
इस प्रतियोगिता के तहत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली तीन टीमों को पुरस्कार भी दिए जाएंगे। प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली टीम को 15 लाख रुपये, द्वितीय स्थान को 10 लाख रुपये और तृतीय स्थान प्राप्त टीम को 5 लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव लगातार बढ़ रहे हैं। हीटवेव, बाढ़, सूखा और चक्रवात जैसी प्राकृतिक घटनाएं कृषि और ग्रामीण आजीविका के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं। हालांकि हाल के वर्षों में जलवायु से संबंधित डेटा की उपलब्धता बढ़ी है, लेकिन यह डेटा विभिन्न प्लेटफॉर्म और वेबसाइटों पर बिखरा हुआ है, जिससे इसका प्रभावी उपयोग करना मुश्किल हो जाता है।
नाबार्ड के अध्यक्ष डॉ. शाजी के अनुसार, देश ने जलवायु डेटा के संग्रह और विश्लेषण में काफी प्रगति की है, लेकिन चुनौती यह है कि अलग-अलग स्रोतों पर उपलब्ध डेटा को एक साथ जोड़कर उपयोगी और निर्णय आधारित जानकारी तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि इस इनोवेशन चैलेंज का उद्देश्य देश के प्रतिभाशाली दिमागों को एक मंच देना है, ताकि वे ऐसा तकनीकी समाधान विकसित कर सकें जो विभिन्न जलवायु डेटा स्रोतों को एकीकृत कर सके।
इस पहल का एक बड़ा लक्ष्य जलवायु डेटा को आम लोगों और नीति निर्माताओं के लिए अधिक सुलभ और उपयोगी बनाना भी है। इससे किसानों, ग्रामीण समुदायों और प्रशासन को समय रहते जलवायु जोखिमों की जानकारी मिल सकेगी और वे बेहतर निर्णय ले सकेंगे।
नाबार्ड का मानना है कि तकनीक और डेटा के बेहतर उपयोग से ग्रामीण भारत को अधिक लचीला और सुरक्षित बनाया जा सकता है। यह पहल देश में टिकाऊ कृषि और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
गौरतलब है कि नाबार्ड की स्थापना 12 जुलाई 1982 को हुई थी और इसका मुख्यालय मुंबई में स्थित है। यह संस्था कृषि और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता, संस्थागत विकास और विभिन्न नवाचारों के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है।





