होली की धूम: Bihar सहित दिल्ली, मथुरा, काशी और अयोध्या में उत्सव
रंगों, भजन और परंपरा के बीच पटना समेत बिहार के शहरों में टोलियां घर-घर घूमीं; प्रशासन ने सुरक्षा व भीड़ प्रबंधन हेतु पुख्ता इंतजाम किए।
देशभर में होली का उल्लास देखने को मिला और खासकर शहरी व तीर्थस्थल—पहले से तय रौनक के साथ—त्योहार का पूरा महौल बना रहा। Delhi के स्टेडियमों, कॉलोनियों व कम्युनिटी हॉलों में कलर पार्टी, रेन-डांस और पारिवारिक जमावड़े रहे, जहाँ युवा-परिवार रंगों में सराबोर दिखे। लोगों ने सुरक्षित तौर पर मस्ती करते हुए गुझिया व अन्य पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लिया।
ब्रजभूमि में परंपरा की शान बरकरार रही—Mathura-वृंदावन में लट्ठमार होली और मंदिरों में फाग गीतों ने भक्तों को भावविभोर कर दिया। बांके बिहारी समेत कई मंदिरों के प्रांगणों से निकलती होली टोलीयों ने स्थानीय रंग-राग को जीवंत रखा। वहीं काशी में गंगा घाटों पर होली का आध्यात्मिक रंग छाया रहा; Varanasi के घाटों पर श्रद्धालु रंग और भजन के साथ शामिल हुए और मंदिरों में पुजारी-भक्त मिलकर पर्व मनाते दिखे।
उत्तर प्रदेश के प्रमुख तीर्थस्थलों के साथ-साथ अयोध्या में भी राम मंदिर व हनुमानगढ़ी के परिसर में भक्तों ने गुलाल खेल कर धार्मिक उल्लास का प्रदर्शन किया। Ayodhya में नागा संप्रदाय और संत-भक्तों की उपस्थिति ने पारंपरिक होली को और आत्मिक आयाम दिया।
बिहार में भी उत्सव रंगा-रंग दिखा। राज्य की राजधानी Patna के कई इलाकों में टोलियां घर-घर जाकर होली खेलीं, बाजारों में रंग-पिचकारी और मिठाइयों की भीड़ रही। गांवों में पारंपरिक तरीके से होलिका दहन और सामूहिक भजन-कीर्तन किए गए, जिससे सामाजिक समरसता और भाईचारे का संदेश भी मिले। कई जिलों में सांस्कृतिक समूहों ने मंचस्थ कार्यक्रम प्रस्तुत कर स्थानीय लोकगीतों और नृत्यों से त्योहार को सजाया।
सुरक्षा व्यवस्था की दृष्टि से प्रशासन सतर्क दिखा। कई जिलों में पुलिस और होमगार्ड-बलों की तैनाती, कंट्रोल रूम सक्रिय रखे गए तथा भीड़-प्रबंधन हेतु विशेष गाइडलाइन जारी की गईं। साथ ही सोशल मीडिया पर अफवाह फैलने से रोकथाम और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश पारित किए गए। ट्रैफिक पुलिस ने प्रमुख मार्गों पर एच-ड्यूटी रख कर आवाजाही सुचारू बनायी।
त्योहार का आनंद लेने के साथ मानवीय संवेदनशीलता भी दिखी—कई सामाजिक समुदायों ने जरूरतमंदों के लिए भोजन और पानी का इंतजाम किया। बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगजन के लिए विशेष व्यवस्था की गई, जिससे हर वर्ग ने सुरक्षित व उल्लासपूर्ण होली मनाई।
कुल मिलाकर इस वर्ष की होली ने धार्मिक, सांस्कृतिक व सामाजिक रुख से एकता और उत्साह का संदेश दिया — चाहे बड़े-छोटे शहर हों या तीर्थस्थल, रंग-राग और मेलजोल ने फिर साबित कर दिया कि त्योहार इंसानों को जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम हैं।




