Four More Shots Please!: चार दोस्तों की आज़ादी की कहानी
Four More Shots Please!: चार दोस्तों की कहानी और अपनी शर्तों पर जीने की जिद
ओटीटी प्लेटफॉर्म Amazon Prime Video पर चार सीजन में आई वेब सीरीज फोर मोर शॉट्स प्लीज! शहरी भारतीय महिलाओं की दोस्ती, संघर्ष और आत्मनिर्णय की कहानी को सामने लाती है। यह सीरीज अंजना, सिद्धि, दामिनी और उमंग—इन चार दोस्तों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो रिश्तों, करियर, सेक्सुअलिटी और सामाजिक दबावों के बीच अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीने की कोशिश करती हैं।
सीरीज की सबसे बड़ी ताकत इसके जीवंत और जटिल किरदार हैं। अंजना (कीर्ति कुल्हारी), सिद्धि (मानवी गगरू), दामिनी (सयानी गुप्ता) और उमंग (वीजे बानी) केवल काल्पनिक पात्र नहीं लगते, बल्कि वे दर्शकों की अपनी जिंदगी का हिस्सा बन जाते हैं। उनके फैसले कभी प्रेरित करते हैं, तो कभी चौंकाते हैं। वे गलतियां भी करती हैं, रिश्तों में उलझती हैं, लेकिन अंततः खुद को समझने और संभालने की कोशिश करती हैं। यही भावनात्मक ईमानदारी दर्शकों को उनसे जोड़ती है।
चारों दोस्तों का मिलन स्थल है ‘ट्रक बार’, जिसे जेह (प्रतीक स्मिता पाटिल) चलाते हैं। यह बार सिर्फ पार्टी की जगह नहीं, बल्कि आत्ममंथन का केंद्र बन जाता है। यहीं बैठकर वे अपने टूटे रिश्तों, पेशेवर असफलताओं और निजी उलझनों पर खुलकर बात करती हैं। सीरीज दिखाती है कि दोस्ती सिर्फ खुशियों की साझेदारी नहीं, बल्कि मुश्किल समय में सहारा बनने का नाम भी है।
अंजना का किरदार एक परिपक्व, तलाकशुदा वकील का है, जो एक सिंगल मदर के रूप में अपनी बेटी और करियर के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करती है। खराब रिश्ते से बाहर निकलकर वह आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाती है। अंत तक उसका भारत की बाइक यात्रा का सपना केवल रोमांच नहीं, बल्कि स्वतंत्रता का प्रतीक बन जाता है।
सिद्धि की कहानी आत्मविश्वास की तलाश की कहानी है। बेरोजगारी और बॉडी शेमिंग से जूझती सिद्धि धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाती है। पिता के सहयोग और दोस्तों के साथ से वह अपने करियर और प्रेम जीवन में स्थिरता पाती है। उसका सफर यह संदेश देता है कि आत्मस्वीकृति सबसे बड़ी ताकत है।
दामिनी एक बेबाक पत्रकार है, जो सच बोलने की कीमत चुकाती है। अपनी ही बनाई वेबसाइट से बाहर होने के बाद वह मानसिक संघर्षों से गुजरती है, लेकिन अंततः अपने जुनून की ओर लौटती है। उसका किरदार दर्शकों को बार-बार सोचने पर मजबूर करता है कि पेशेवर ईमानदारी और निजी जीवन के बीच संतुलन कितना कठिन हो सकता है।
उमंग का किरदार महानगरीय जीवन में अपनी पहचान तलाशती एक युवा महिला का है। वह रिश्तों में समझौता करने के बजाय अपनी शर्तों पर जीने का निर्णय लेती है। उसका सफर बताता है कि प्रेम और आत्मसम्मान के बीच चुनाव आसान नहीं होता, लेकिन जरूरी होता है।
सीरीज अपने संवादों और छायांकन के लिए भी चर्चा में रही। अंग्रेजी और हिंदी के बेबाक संवाद शहरी महिला की बेचैनी और आकांक्षाओं को सामने रखते हैं। मुंबई की तेज रफ्तार जिंदगी और समुद्र के दृश्य कहानी को दृश्यात्मक गहराई देते हैं।
हालांकि, आलोचकों का मानना है कि सीरीज का नारीवाद मुख्यतः शहरी, उच्च-मध्यवर्गीय वर्ग तक सीमित है। आर्थिक और सामाजिक असमानताओं पर अपेक्षाकृत कम ध्यान दिया गया है। इसके बावजूद, महिला कामुकता, दोस्ती और आत्मनिर्णय के सवालों को खुलकर उठाने के कारण यह सीरीज समकालीन स्त्री जीवन पर एक अहम बहस छेड़ती है।
कुछ सीमाओं के बावजूद फोर मोर शॉट्स प्लीज! केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आज की भारतीय महिला के संघर्ष, आकांक्षा और स्वतंत्रता की कहानी बनकर उभरती है। यह सीरीज बताती है कि अपनी शर्तों पर जीना आसान नहीं, लेकिन संभव है—अगर साथ में दोस्ती, साहस और आत्मविश्वास हो।





