समस्तीपुर में शिक्षकों को दिया वित्तीय और डिजिटल साक्षरता प्रशिक्षण कार्यक्रम
समस्तीपुर के धुरलख विद्यालय में 50 स्कूलों के नोडल शिक्षकों का प्रशिक्षण, छात्रों को बचत, सही खर्च और सुरक्षित डिजिटल लेनदेन सिखाने पर जोर।
Financial Education : बिहार के समस्तीपुर जिले में छात्रों को वित्तीय रूप से जागरूक और डिजिटल दुनिया के प्रति सजग बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। इसी कड़ी में शनिवार को शहर के उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय धुरलख में जिले के चयनित 50 विद्यालयों के नोडल शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह प्रशिक्षण बिहार शिक्षा परियोजना (बीईपी) के तत्वावधान में आयोजित फाइनेंशियल एंड डिजिटल लिटरेसी प्रोग्राम के तहत किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर डीपीओ एसएसए जमालुद्दीन, एपीओ सुजीत कुमार तथा स्टेट मास्टर ट्रेनर सुभीत कुमार सिंह ने संयुक्त रूप से कार्यक्रम की शुरुआत की। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को वित्तीय साक्षरता और डिजिटल सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां देना था, ताकि वे अपने-अपने विद्यालयों में छात्रों को इसके प्रति जागरूक कर सकें।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीपीओ एसएसए जमालुद्दीन ने कहा कि आज के डिजिटल युग में वित्तीय साक्षरता शिक्षा का एक बेहद अहम हिस्सा बन चुकी है। उन्होंने कहा कि बच्चों को छोटी उम्र से ही पैसे के सही उपयोग, बचत की आदत और जिम्मेदार वित्तीय व्यवहार के बारे में जानकारी दी जानी चाहिए। यदि छात्र शुरू से ही अपनी आय-व्यय का संतुलन समझेंगे, तो भविष्य में वे आर्थिक रूप से अधिक मजबूत और जिम्मेदार नागरिक बन सकेंगे।
एपीओ सुजीत कुमार ने प्रशिक्षण के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस कार्यक्रम के माध्यम से शिक्षक अपने विद्यालयों के छात्रों को बजट बनाना, आय के अनुसार खर्च करना, बचत की योजना तैयार करना और डिजिटल माध्यमों से होने वाले वित्तीय लेन-देन में सावधानी बरतने के बारे में जानकारी देंगे। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी जरूरतों, आकांक्षाओं और बचत के बीच संतुलन बनाना सीखना चाहिए, जिससे आर्थिक स्थिरता बनी रह सके।
स्टेट मास्टर ट्रेनर सुभीत कुमार सिंह ने प्रशिक्षण के दौरान बताया कि वर्तमान समय में डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधों के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में छात्रों को कम उम्र से ही सुरक्षित डिजिटल व्यवहार की जानकारी देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण में मिली जानकारी को शिक्षक अपने विद्यालयों में छात्र-छात्राओं तक पहुंचाएंगे, जिससे वे साइबर ठगी से बचने के तरीके सीख सकें।
प्रशिक्षण के दौरान नोडल शिक्षकों को साइबर अपराध के विभिन्न तरीकों के बारे में विस्तार से बताया गया। उन्हें यह भी समझाया गया कि किस प्रकार ठग लोग पिन कोड, ओटीपी या अन्य गोपनीय जानकारी प्राप्त कर बैंक खातों से अवैध निकासी कर लेते हैं। इसलिए डिजिटल लेन-देन के दौरान सतर्क रहना बेहद जरूरी है।
कार्यक्रम में विभिन्न प्रखंडों से आए नोडल शिक्षकों ने प्रशिक्षण को काफी उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि इससे छात्रों में बचत की आदत विकसित होगी और वे भविष्य के लिए आर्थिक रूप से अधिक सजग बन सकेंगे। इस अवसर पर शिक्षक ऋतुराज, राहुल कुमार सहित कई अन्य शिक्षक भी उपस्थित रहे।




