- फरवरी में ही सूखी दिखने लगी बागमती नदी
- सिंचाई पर निर्भर दर्जनों गांवों में चिंता
- जल संरक्षण की दीर्घकालिक योजना की जरूरत
- उत्पादन घटने की आशंका से किसान मायूस
समस्तीपुर जिले के खानपुर प्रखंड से होकर गुजरने वाली बागमती नदी में इन दिनों पानी की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। अभी गर्मी का मौसम पूरी तरह शुरू भी नहीं हुआ है, लेकिन नदी का जलस्तर अन्य वर्षों की तुलना में काफी नीचे चला गया है। कई स्थानों पर नदी की धारा सूखी नजर आ रही है, जिससे खेती-किसानी पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि पहले बागमती नदी सालभर लबालब भरी रहती थी। जून के आसपास जलस्तर में गिरावट देखने को मिलती थी, लेकिन इस वर्ष फरवरी में ही नदी का सूखना असामान्य स्थिति पैदा कर रहा है। श्रीपुर गाहर, गुदार घाट, हांसोपुर, शादीपुर, गोविंदपुर, फतेहपुर, विक्रम पट्टी सहित दर्जनों गांवों के किसान सिंचाई के लिए पूरी तरह बागमती पर निर्भर हैं।
किसानों का कहना है कि यदि गर्मी के मौसम में नदी में पर्याप्त पानी नहीं रहा, तो धान, मक्का और सब्जी जैसी फसलों की सिंचाई प्रभावित होगी। इससे उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है और आर्थिक संकट गहरा सकता है। हजारों परिवारों की आजीविका सीधे तौर पर इस नदी पर टिकी है।
बागमती नदी दरभंगा से होकर समस्तीपुर जिले के वारिसनगर, शिवाजीनगर और खानपुर प्रखंड के पूर्वी हिस्सों से गुजरते हुए रोसड़ा अनुमंडल की ओर बहती है। इन इलाकों के किसान वर्षों से इसी जलस्रोत पर निर्भर रहे हैं।
कुछ समय पूर्व नदी की सफाई, चौड़ीकरण और उड़ाहीकरण का कार्य भी कराया गया था, लेकिन इसके बावजूद जल संचय नहीं हो सका। विशेषज्ञों का मानना है कि जल संरक्षण की दीर्घकालिक योजना और वैकल्पिक सिंचाई व्यवस्था के बिना समस्या का समाधान संभव नहीं है।
फिलहाल किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए हैं और समय रहते पर्याप्त वर्षा या सरकारी पहल की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि आने वाली फसल पर संकट न गहराए।
- उत्पादन घटने की आशंका से किसान मायूस




