Pulwama की दर्दनाक याद: सातवीं बरसी — शहीदों को नमन, कुछ याद है?
पुलवामा सातवीं बरसी पर शहीदों को श्रद्धांजलि, 40 जवानों की शहादत, वादों को पूरा करना जारी

14 फरवरी 2019 के उस भीषण आत्मघाती हमले की सातवीं बरसी पर देशभर में शोक-और श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। उस दिन हुए विस्फोट में केंद्रीय सशस्त्र प्रहरी बल — Central Reserve Police Force (CRPF) के 40 जवान शहीद हुए थे; आज भी उनकी यादें और परिवारों का दर्द वैसा ही ताजा है।
वो दोपहर जब जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर लेथपोरा के पास CRPF के काफिले को निशाना बनाया गया, विस्फोटक से भरी कार ने सुरक्षा वाहन को टक्कर मारी थी — विस्फोट इतना प्रचंड था कि मौके पर ही दर्जनों जवान शहीद हो गए और कई गम्भीर रूप से घायल हुए। इस घटना ने न सिर्फ स्थानीय जनजीवन को बल्कि पूरे देश को झकझोरा और आतंकवाद-विरोधी नीतियों तथा सुरक्षात्मक व्यवस्था पर गहरी बहस छेड़ दी।
हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन — Jaish‑e‑Mohammed ने ली थी। इसके बाद कूटनीतिक तनाव तेज हुआ और भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाने के साथ कड़े कदम उठाने की घोषणा की। गृह मंत्रालय और अन्य केन्द्रीय एजेंसियों ने हमले की जांच और मामले की पैठ की कार्रवाई शुरू की।
राष्ट्रीय प्रतिशोध का नाटकीय अध्याय तब और धार पकड़ गया जब भारतीय वायुसेना ने 26 फरवरी 2019 को पाकिस्तान के बालाकोट में कथित जैश-प्रशिक्षण शिविर पर हवाई कार्रवाई की — जिसे सार्वजनिक रूप से बालाकोट एयरस्ट्राइक कहा गया। कुछ दिनों बाद हुए हवाई मुठभेड़ में भारतीय पायलट Abhinandan Varthaman का विमान पाकिस्तान के नियंत्रण में गिरा; उन्हें पकड़ा गया और 1 मार्च 2019 को छोड़कर भारत लौटाया गया — यह वापसी भारत में राष्ट्रीय गर्व और राहत के क्षण के रूप में देखी गई।
आज के बरसी मौके पर केन्द्र और राज्य सरकारों के शीर्ष नेता, सामाजिक संगठन और आम नागरिक शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने ट्वीट/बयान के माध्यम से शहीदों को नमन किया और उनके पराक्रम को देश की प्रेरणा बताया। देश के अलग-अलग शहरों में कैंडल मार्च, पुष्पांजलि और मौन सभा का आयोजन हुआ — जहां लोगों ने एकजुट होकर आतंकवाद के खिलाफ दृढ़ संकल्प दोहराया।
बरसी के मौके पर सुरक्षा व्यवस्था को खासा कड़ा रखा गया। जम्मू-कश्मीर के संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस व सुरक्षा बलों ने चेकिंग बढ़ाई, पर्यटन स्थानों और प्रमुख सार्वजनिक स्थलों की निगरानी और पहचान-जाँच तेज की गई — इसका मकसद संभावित किसी भी खतरे को पहले से टालना बताया गया। सोशल मीडिया और सार्वजनिक स्थानों पर नागरिकों से संयम और सतर्कता बरतने का अनुरोध किया गया।
स्थानीय-स्तर पर वादों का पूरा होना — कानपुर की दास्तान
बरसी की तारीख पर ही कुछ वादों का पूरा होना भी समाचार का हिस्सा रहा। उत्तर प्रदेश के Kanpur में उन पारिवारिक वादों में से एक पूरा हुआ, जो पुलवामा के बाद एक रियल-एस्टेट कंपनी ने किए थे। कंपनी के निदेशकों ने दो शहीदों की पत्नियों के नाम सौ-सौ वर्गगज जमीन की रजिस्ट्री कराकर वादा पूरा किया — शहीद Pradeep Singh Yadav और शहीद Shyam Babu की पत्नियों को यह राहत मिली। इस पहल का स्थानीय लोगों ने स्वागत किया और परिजनों ने भावुकता के साथ उस दिन-घटनाओं को याद किया।
कानपुर के मामलों में, Triyam Realtech के निदेशकों ने अदालत में गिफ्ट-डीड पंजीकृत कराकर यह ज़मीन हस्तांतरित की; परिजनों ने कहा कि यह छोटी-सी कोशिश भी परिवारों के लिए स्थायी सुरक्षा का आधार बनेगी। शहीदों की पत्नियाँ और उनके बच्चे उन आख़िरी कॉल-घड़ियों को याद कर भावुक हुए — कुछ ने बताया कि उनके पति छुट्टी से लौटे थे और फिर वे अलगंत समाचार के बाद जीवन-परिवर्तनकारी क्षणों से गुज़रे।
पुलवामा ने निहित सबक दिए — सुरक्षा, खुफिया समन्वय और सहानुभूति
विशेषज्ञों का मानना है कि पुलवामा के बाद सुरक्षा तंत्र में कई अहम परिवर्तन हुए — खुफिया एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत किया गया, संवेदनशील मार्गों की निगरानी बढ़ाई गई और काफिलों की आवाजाही के लिए नई-नई सुरक्षा प्रक्रियाएँ लागू की गईं। इन सुधारों का उद्देश्य है- ऐसे हमलों की पुनरावृत्ति को रोकना और सशक्त बचाव तैयार रखना।
साथ ही यह दिन पारिवारिक वायदों और समाज की ज़िम्मेदारी की ओर भी ध्यान खींचता है — सरकारों और नागरिक समाज के लिए यह एक मौका है कि वे शहीद परिवारों के दीर्घकालिक कल्याण के लिये ठोस कदम उठाएँ: आर्थिक मदद, शिक्षा और आवास जैसी आवश्यकताओं पर टिकाऊ योजनाएँ लागू हों। कानपुर की हालिया पहल ने यही दिखाया कि निजी पहलें भी कभी-कभी परिजनों को वास्तविक राहत दे सकती हैं — पर यह पर्याप्त नहीं है; दीर्घकालिक राज्य-नीतियाँ अनिवार्य हैं।
सात साल बाद भी पुलवामा की याद केवल इतिहास नहीं, बल्कि सतर्कता और देशभक्ति का पाठ है। जिस तरह आज देश ने उन 40 जवानों को नमन किया, वह केवल श्रद्धांजलि भर नहीं — यह एक संकल्प है कि उनके बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा और देश की एकता-अखंडता की रक्षा के लिये हर स्तर पर मेहनत जारी रहेगी।





