‘रिवाज’ में दिखा तीन तलाक का दर्द, ज़ैनब की कहानी रुला देगी हर दिल’
हक ही नहीं, ‘रिवाज’ में भी दिखा तीन तलाक का दर्द: ज़ैनब के संघर्ष की कहानी रुला देगी
मिथुन चक्रवर्ती की फिल्म ‘रिवाज’ एक बेहद संवेदनशील और गंभीर सामाजिक मुद्दे को उठाती है — तीन तलाक। यह फिल्म सिर्फ कानून की बहस नहीं करती, बल्कि उस मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक टूटन को सामने लाती है, जिससे एक महिला गुजरती है जब एक खत, एक मैसेज या एक शब्द से उसकी पूरी दुनिया उजाड़ दी जाती है।
फिल्म की कहानी ज़ैनब (मायरा सरीन) नाम की एक औरत के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे उसका पति हनीफ (आफताब शिवदासानी) स्पीड पोस्ट के ज़रिए तीन तलाक का नोटिस भेज देता है। एक खत के साथ सालों का रिश्ता खत्म कर दिया जाता है। यह वही कड़वी सच्चाई है जिसे ‘रिवाज’ बेहद संवेदनशील तरीके से परदे पर उतारती है।
ज़ैनब के संघर्ष की कहानी
फिल्म की शुरुआत ज़ैनब से होती है — एक साहसी लेकिन हालात से मजबूर औरत। उसकी शादी समाज के दबाव में होती है, लेकिन जल्द ही यह रिश्ता उसके लिए एक बुरा सपना बन जाता है। उसका पति और ससुराल वाले उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करते हैं। ज़ैनब दिन-रात घर के कामों में उलझी रहती है और हर दर्द को चुपचाप सहती रहती है।
हालात इतने खराब हो जाते हैं कि ससुराल वाले उसे चोरी-छिपे अबॉर्शन तक के लिए मजबूर करते हैं। जब ज़ैनब पूरी तरह टूट जाती है, तो वह अपने मायके जाने का फैसला करती है। लेकिन उसे अंदाज़ा भी नहीं होता कि उसके पीछे क्या होने वाला है।
जब एक खत ने रिश्ता तोड़ा
ज़ैनब के घर छोड़ते ही हनीफ उसे स्पीड पोस्ट से तीन तलाक का नोटिस भेज देता है। एक खत के साथ सालों का रिश्ता खत्म कर दिया जाता है। इस तलाक के बाद ज़ैनब अकेली पड़ जाती है और उसे कानून, समाज और अपने ही लोगों के तानों का सामना करना पड़ता है।
लेकिन ज़ैनब हार नहीं मानती। दिल टूटने के बावजूद वह अपने हक के लिए लड़ने का फैसला करती है। उसकी जिंदगी में तब मोड़ आता है जब उसकी मुलाकात सुप्रीम कोर्ट के वकील रमजान कादिर (मिथुन चक्रवर्ती) से होती है, जो उसे इंसाफ की राह दिखाते हैं।
मिथुन चक्रवर्ती ने फिल्म को दी मजबूती
एक्टिंग की बात करें तो मायरा सरीन ने अपनी डेब्यू फिल्म में ज़ैनब के दर्द और मजबूती को ईमानदारी से निभाया है। आफताब शिवदासानी ने नेगेटिव रोल में बेहतरीन परफॉर्मेंस दी है — उनका किरदार दर्शकों में गुस्सा पैदा करता है, जो इस रोल की सबसे बड़ी सफलता है।
मिथुन चक्रवर्ती की एंट्री के बाद फिल्म की पकड़ और मजबूत हो जाती है। उनके डायलॉग्स, स्क्रीन प्रेजेंस और संवेदनशील अभिनय फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बनते हैं। जया प्रदा एक एक्टिविस्ट के रूप में और जाकिर हुसैन एक विरोधी वकील के रूप में छोटे लेकिन असरदार किरदारों में नजर आते हैं।
क्यों देखनी चाहिए ‘रिवाज’
‘रिवाज’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक सामाजिक आईना है। यह बताती है कि तीन तलाक जैसी प्रथा किसी महिला की जिंदगी को किस तरह तोड़ देती है — उसका आत्मसम्मान, उसका भविष्य और उसकी पहचान सब कुछ छीन लेती है।
अगर आप ऐसी फिल्म देखना चाहते हैं जो आपको भावनात्मक रूप से झकझोर दे और सोचने पर मजबूर करे, तो ‘रिवाज’ जरूर देखें। ज़ैनब का संघर्ष देखकर शायद आपकी भी आंखों में आंसू आ जाएँ।





