Delhiराष्ट्रीय समाचारसमाचार

UGC नियमों पर रोक -सुप्रीम कोर्ट; SC/ST छात्र कर सकेंगे शिकायत?

UGC नियमों पर रोक के बाद भी SC/ST छात्र कर सकेंगे शिकायत? सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया रुख

फोटो सभार सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली : UGC के कुछ नियमों पर रोक लगने के बाद यह सवाल उठने लगा था कि क्या अब SC/ST और अन्य पिछड़े वर्ग के छात्र कैंपस में होने वाले भेदभाव और रैगिंग के खिलाफ शिकायत नहीं कर पाएंगे। इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त और स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा है कि नियमों पर रोक का मतलब यह नहीं है कि भेदभाव के खिलाफ कार्रवाई भी रुक जाएगी।

यूजीसी नियमों से जुड़ी सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने समाज में बढ़ते जातिगत और क्षेत्रीय भेदभाव पर गहरी चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि कॉलेज कैंपस समानता और सम्मान के स्थान होने चाहिए, न कि नफरत और तिरस्कार के।

“क्या हम पीछे जा रहे हैं?” — जस्टिस सूर्यकांत

सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने कहा,
“आजादी के 75 साल बाद क्या हम एक ऐसे समाज की ओर बढ़ रहे हैं जो पीछे की तरफ जा रहा है? हमारा सपना एक ऐसा भारत था जहां कोई ऊंच-नीच न हो, लेकिन आज पहचान और जाति के नाम पर दूरियां बढ़ रही हैं।”

उन्होंने कहा कि रैगिंग के नाम पर किसी के खान-पान, पहनावे या संस्कृति का मजाक उड़ाना बिल्कुल गलत है। खासकर दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर राज्यों से आने वाले छात्रों को निशाना बनाया जाना गंभीर चिंता का विषय है।

यह भी पढ़ें  आजमगढ़; समर सिंह के रिसेप्शन में फिल्मी सितारों का जलवा'

संस्कृति और खान-पान का मजाक बर्दाश्त नहीं

कोर्ट ने साफ कहा कि अगर कोई छात्र अपनी भाषा, खान-पान या परंपरा के साथ आता है तो उस पर टिप्पणी करना या उसे नीचा दिखाना अस्वीकार्य है।
बेंच में शामिल जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि भारत अमेरिका के उस दौर जैसा न बने जहां कभी नस्ल के आधार पर स्कूल अलग-अलग हुआ करते थे।

कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर अभी सख्ती नहीं दिखाई गई, तो शरारती तत्व इस स्थिति का गलत फायदा उठाएंगे।

कमेटी बनाने का सुझाव

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और यूजीसी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि इस पूरे मामले की गहराई से समीक्षा के लिए विशेषज्ञों की एक प्रतिष्ठित कमेटी बनाई जाए।
इस कमेटी का उद्देश्य होगा यह सुनिश्चित करना कि कैंपस में किसी भी तरह का जातिगत, धार्मिक या क्षेत्रीय भेदभाव न हो और सभी छात्रों को समान अवसर मिलें।

यह भी पढ़ें  बिहार; सिमरिया का पहला 6-लेन पुल: लोगों को मिलेगी जाम से मुक्ति

तो क्या SC/ST छात्र अब शिकायत नहीं कर पाएंगे?

इस सवाल का सीधा जवाब है — नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है।
UGC नियमों पर रोक का मतलब यह नहीं है कि SC/ST या किसी भी वर्ग के छात्र अब भेदभाव के खिलाफ आवाज नहीं उठा सकते।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि छात्रों के अधिकार सुरक्षित हैं और किसी भी तरह के अन्याय पर कार्रवाई जारी रहेगी।

सच के साथ खड़े हों — स्वतंत्र पत्रकारिता का समर्थन करें। Gaam Ghar

Donate via UPI

UPI ID: 7903898006@sbi

2012 के SC/ST एंटी-डिस्क्रिमिनेशन नियम क्या थे?

साल 2012 में UGC ने उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए एक औपचारिक ढांचा बनाया था। इसका उद्देश्य SC, ST, जेंडर, धर्म और भाषा के आधार पर होने वाले अन्याय को खत्म करना था।

मुख्य प्रावधान थे:

हर कॉलेज में Equal Opportunity Cell बनाना अनिवार्य
एक Anti-Discrimination Officer की नियुक्ति
शिकायत निपटाने के लिए 60 दिन की समय सीमा

यह भी पढ़ें  ननद और भौजाई के प्यार भरे रिश्ते को दर्शता 'भउजी रे फौजी चाही'

शिकायत की प्रक्रिया कैसी थी?

अगर किसी छात्र के साथ भेदभाव होता था, तो वह लिखित शिकायत Anti-Discrimination Officer को देता था।
इसके बाद:

जांच होती थी
रिपोर्ट कॉलेज प्रशासन को जाती थी
दोषी पाए जाने पर शिक्षक, स्टाफ या छात्र पर सख्त कार्रवाई की सिफारिश होती थी

इन नियमों की कमजोरियां क्या थीं?

2012 के नियमों में कुछ कमियां भी थीं:

▪️ झूठी शिकायतों पर कोई स्पष्ट दंड नहीं
▪️ जांच पूरी तरह कॉलेज के अंदरूनी लोगों पर निर्भर
▪️ निष्पक्षता पर कई बार सवाल उठे

इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट चाहता है कि नियमों को और मजबूत और पारदर्शी बनाया जाए।

सुप्रीम कोर्ट का संदेश साफ

कोर्ट की टिप्पणियों से यह साफ है कि:

भेदभाव पर कोई समझौता नहीं होगा
SC/ST और सभी वर्गों के छात्र शिकायत कर सकते हैं
कैंपस में समानता और सम्मान सर्वोपरि है

सुप्रीम कोर्ट चाहता है कि भारत का शैक्षणिक माहौल ऐसा बने जहां हर छात्र बिना डर और भेदभाव के पढ़ सके।

Gaam Ghar Desk

गाम घर डेस्क के साथ भारत और दुनिया भर से नवीनतम ब्रेकिंग न्यूज़ और विकास पर नज़र रखें। राजनीति, एंटरटेनमेंट और नीतियों से लेकर अर्थव्यवस्था और पर्यावरण तक, स्थानीय मुद्दों से लेकर राष्ट्रीय घटनाओं और वैश्विक मामलों तक, हमने आपको कवर किया है। Follow the latest breaking news and developments from India and around the world with 'Gaam Ghar' news desk. From politics , entertainment and policies to the economy and the environment, from local issues to national events and global affairs, we've got you covered.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button