योगी समर्थन पर इस्तीफा, प्रशांत सिंह का सियासी सफर उजागर
योगी समर्थन में इस्तीफा देने वाले अधिकारियों पर सियासी घमासान, GST अधिकारी प्रशांत सिंह का राजनीतिक सफर आया सामने

मऊ, अयोध्या : उत्तर प्रदेश में इन दिनों अधिकारियों के इस्तीफों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे से शुरू हुआ विवाद अभी थमा भी नहीं था कि मंगलवार को अयोध्या के डिप्टी कमिश्नर (GST) प्रशांत सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में अपने पद से इस्तीफा देकर नया बवाल खड़ा कर दिया। इन दोनों इस्तीफों ने प्रशासनिक मर्यादा, राजनीतिक झुकाव और सरकारी सेवा में निष्पक्षता जैसे मुद्दों पर बहस छेड़ दी है।
सूत्रों के अनुसार, बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने शंकराचार्य से जुड़े कथित विवाद और यूजीसी के नए नियमों पर उठे बवाल के बीच सोमवार को अपने पद से त्यागपत्र दिया था। उनका कहना था कि वे विचारधारा के स्तर पर समझौता नहीं कर सकते। इसके तुरंत बाद अयोध्या में तैनात डिप्टी कमिश्नर (GST) प्रशांत सिंह ने सार्वजनिक रूप से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में इस्तीफा देकर सियासी आग को और हवा दे दी।
प्रशांत सिंह का नाम अब केवल एक अधिकारी के तौर पर नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति के रूप में सामने आ रहा है, जिनका राजनीतिक जुड़ाव पहले से रहा है। जांच में सामने आया है कि प्रशांत कुमार सिंह, पुत्र त्रिपुरारी सिंह, का जन्म 28 अक्टूबर 1978 को मऊ जिले के सरवां गांव में हुआ। उनकी शुरुआती पढ़ाई जीवन राम इंटर कॉलेज से हाई स्कूल तक हुई, जबकि इंटरमीडिएट उन्होंने विद्युत परिषद स्कूल, टांडा से किया। उच्च शिक्षा के लिए वे वाराणसी गए और उदय प्रताप महाविद्यालय से स्नातक की डिग्री प्राप्त की।
इसके बाद उन्होंने आजमगढ़ से एलएलबी (सिविल) की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के दौरान और उसके बाद प्रशांत सिंह सामाजिक गतिविधियों और शिक्षण कार्यों में भी सक्रिय रहे। वर्ष 2008 में उन्होंने मऊ के निजामुद्दीनपुरा इलाके में एक कोचिंग संस्थान की शुरुआत की, जिसे 2013 तक सफलतापूर्वक संचालित किया। छात्र जीवन से ही वे पढ़ाने और समाजसेवा से जुड़े रहे।
प्रशासनिक सेवा में उनका चयन वर्ष 2013 में हुआ और पहली तैनाती सहारनपुर में डिप्टी कमिश्नर के पद पर हुई। हालांकि, जांच में यह भी सामने आया है कि प्रशासनिक सेवा में आने से पहले और उसके बाद भी उनका राजनीतिक रुझान बना रहा। कोचिंग संचालन के दौरान ही वे अमर सिंह की पार्टी से जुड़े और 2010–11 में राष्ट्रीय लोक मंच पार्टी के गठन के समय मऊ जिले के अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभाई।
सूत्र बताते हैं कि प्रशांत सिंह अमर सिंह के करीबी माने जाते रहे हैं। उन्होंने 2022 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में टिकट पाने की कोशिश भी की थी, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। अब मुख्यमंत्री योगी के समर्थन में दिया गया उनका इस्तीफा इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि वे एक बार फिर सक्रिय राजनीति में उतरने की तैयारी कर रहे हैं।
इन दोनों इस्तीफों के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या सरकारी अधिकारियों को अपने पद पर रहते हुए राजनीतिक झुकाव सार्वजनिक करना चाहिए? क्या यह सेवा नियमों का उल्लंघन नहीं है? प्रशासनिक गलियारों में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर गंभीर मंथन शुरू हो गया है। फिलहाल यह विवाद कहां जाकर थमेगा, यह कहना मुश्किल है, लेकिन इतना तय है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति और नौकरशाही के रिश्तों पर यह मामला दूरगामी असर डाल सकता है।



