2027 तक H-1B वीजा इंटरव्यू फुल, भारतीय पेशेवरों की अमेरिका यात्रा अटकी
2027 तक H-1B वीजा इंटरव्यू स्लॉट फुल, अमेरिका जाने वाले भारतीय पेशेवरों की बढ़ी मुश्किलें
अमेरिका में काम कर रहे और काम करने की तैयारी कर रहे हजारों भारतीय पेशेवरों के लिए बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है। भारत में अमेरिकी दूतावासों में H-1B वीजा स्टैम्पिंग इंटरव्यू की तारीखें अब 2027 तक भर चुकी हैं। दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद और कोलकाता—किसी भी शहर में फिलहाल नियमित इंटरव्यू स्लॉट उपलब्ध नहीं हैं। इससे न सिर्फ कर्मचारियों की योजनाएं अटक गई हैं, बल्कि अमेरिकी कंपनियों को भी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
दिसंबर 2025 से शुरू हुई देरी की समस्या
यह समस्या दिसंबर 2025 में सामने आई थी, जब तय इंटरव्यू को पहले मार्च 2026 में शिफ्ट किया गया। इसके बाद कई मामलों में तारीखें अक्टूबर 2026 और अब 2027 तक बढ़ा दी गई हैं। इससे उन लोगों की परेशानी बढ़ गई है जो भारत यात्रा पर आकर वीजा स्टैम्पिंग कराने आए थे और अब लंबे समय तक अमेरिका वापस नहीं जा पा रहे।
नई नीतियों से बढ़ा दबाव
देरी की एक बड़ी वजह अमेरिका की नई वीजा नीतियां हैं। 15 दिसंबर 2025 से रोजगार आधारित वीजा आवेदकों के लिए सोशल मीडिया जांच अनिवार्य कर दी गई है। अब हर आवेदक के सोशल मीडिया अकाउंट्स की भी जांच होती है, जिससे हर केस में ज्यादा समय लग रहा है और रोजाना होने वाले इंटरव्यू की संख्या घट गई है।
इसके अलावा, 29 दिसंबर 2025 को अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) ने वित्त वर्ष 2027 के लिए H-1B वीजा से जुड़े नए नियम जारी किए। हालांकि, कुल वीजा की संख्या अब भी 85 हजार ही है, जिनमें 20 हजार अमेरिकी पोस्टग्रेजुएट डिग्री धारकों के लिए आरक्षित हैं।
थर्ड कंट्री स्टैम्पिंग बंद होने से बढ़ी परेशानी
अमेरिकी विदेश विभाग ने वह सुविधा भी खत्म कर दी है, जिसमें भारतीय नागरिक किसी तीसरे देश से वीजा स्टैम्पिंग करा सकते थे। पहले कई लोग दुबई, सिंगापुर या थाईलैंड जैसे देशों से वीजा स्टैम्पिंग करा लेते थे। अब पूरा दबाव सिर्फ भारतीय दूतावासों पर आ गया है, जिससे इंतजार और लंबा हो गया है।
लॉटरी सिस्टम में बदला प्राथमिकता पैटर्न
H-1B लॉटरी में अब कर्मचारियों के स्किल लेवल को भी ज्यादा महत्व दिया जा रहा है।
▪️ लेवल IV कर्मचारियों को – 4 एंट्री
▪️ लेवल III को – 3 एंट्री
▪️ लेवल II को – 2 एंट्री
▪️ लेवल I को – 1 एंट्री
इसका मतलब है कि ज्यादा सीनियर और स्पेशलाइज्ड प्रोफेशनल्स को लॉटरी में बेहतर मौका मिलेगा।
अमेरिकी कंपनियों पर भी असर
इस देरी का असर अमेरिकी कंपनियों पर भी साफ दिख रहा है। आईटी, हेल्थकेयर और शिक्षा जैसे सेक्टर H-1B कर्मचारियों पर काफी निर्भर हैं। कर्मचारियों की लंबी गैरहाजिरी से प्रोजेक्ट में देरी, टीम में अव्यवस्था और लागत बढ़ने जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं।
कुछ कंपनियां कर्मचारियों को सीमित रिमोट वर्क की अनुमति दे रही हैं, जबकि कुछ अस्थायी तौर पर जिम्मेदारियां बदल रही हैं। वहीं कई अमेरिकी कंपनियां अब ज्यादा अमेरिकी नागरिकों की भर्ती कर रही हैं ताकि भविष्य में जोखिम कम किया जा सके।
आगे की चिंता क्या है?
इमिग्रेशन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह देरी लंबे समय तक जारी रही, तो अमेरिका की वैश्विक टैलेंट आकर्षित करने की क्षमता कमजोर हो सकती है। खासकर तब, जब कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय देश स्किल्ड वर्कर वीजा प्रक्रिया को लगातार आसान बना रहे हैं।
फिलहाल H-1B वीजा पर निर्भर हजारों भारतीय पेशेवरों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है—अब इंतजार के अलावा कोई रास्ता नहीं।





