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तेजस्वी बने RJD के कार्यकारी अध्यक्ष, रोहिणी का तंज बना सुर्खियों में मुद्दा

‘कठपुतली बने शहजादा’ की ताजपोशी मुबारक: राजद की कमान मिलते ही तेजस्वी पर बरसीं बहन रोहिणी

पटना : राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में नेतृत्व परिवर्तन के साथ ही सियासी हलचल तेज हो गई है। पार्टी ने बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त कर दिया है। इस फैसले के साथ ही राजद में ‘लालू युग’ के औपचारिक अंत और नई पीढ़ी के नेतृत्व की शुरुआत मानी जा रही है। लेकिन इस अहम जिम्मेदारी के साथ ही तेजस्वी यादव को परिवार के भीतर से ही तीखी टिप्पणी का सामना करना पड़ा है। उनकी बहन रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए उन्हें ‘कठपुतली बने शहजादा’ कह दिया।

पटना के होटल मौर्य में आयोजित RJD की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में यह फैसला लिया गया। बैठक में भोला यादव ने तेजस्वी यादव के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसे सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई। इस मौके पर पार्टी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, सांसद मीसा भारती, राज्यसभा सांसद संजय यादव समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। बैठक में बिहार विधानसभा चुनाव में मिली हार, संगठन की कमजोरियों और भविष्य की रणनीति पर भी गहन चर्चा की गई।

तेजस्वी यादव को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने को पार्टी में नेतृत्व के हस्तांतरण के रूप में देखा जा रहा है। लालू यादव 1997 में पार्टी की स्थापना से ही इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे हैं और लंबे समय तक पार्टी की दिशा तय करते रहे। अब तेजस्वी को संगठनात्मक कमान सौंपकर पार्टी ने युवा नेतृत्व पर भरोसा जताया है।

हालांकि इस फैसले के तुरंत बाद तेजस्वी की बहन रोहिणी आचार्य का बयान सामने आया, जिसने सियासी माहौल को और गर्मा दिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा,
“सियासत के शिखर पुरुष की गौरवशाली पारी का एक तरह से पटाक्षेप, ठकुरसुहाती करने वालों और ‘गिरोह-ए-घुसपैठ’ को उनके हाथों की ‘कठपुतली बने शहजादा’ की ताजपोशी मुबारक।”

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रोहिणी के इस बयान को पार्टी के भीतर असंतोष और वैचारिक मतभेद के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले भी उन्होंने ‘लालूवादी’ विचारधारा को लेकर तीखी टिप्पणी की थी और कहा था कि जो वास्तव में लालूवादी होगा, वही सामाजिक और आर्थिक न्याय के लिए निःस्वार्थ संघर्ष करेगा।

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राजद के भीतर इस समय दोहरी चुनौती है — एक ओर चुनावी हार से उबरना और दूसरी ओर संगठन को नए सिरे से मजबूत करना। तेजस्वी यादव के सामने पार्टी को एकजुट रखने और कार्यकर्ताओं में भरोसा जगाने की बड़ी जिम्मेदारी है। वे पहले उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं और अब नेता प्रतिपक्ष के तौर पर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेजस्वी की ताजपोशी से पार्टी में युवा चेहरा सामने आया है, लेकिन परिवार और संगठन के भीतर उठ रहे सवाल उनके लिए चुनौती बन सकते हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि तेजस्वी यादव इस नई भूमिका में पार्टी को किस दिशा में ले जाते हैं और क्या वे लालू यादव की राजनीतिक विरासत को नए सांचे में ढाल पाते हैं या नहीं।

Gaam Ghar Desk

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