
पटना : जिस बिहार को लंबे समय तक केवल अपनी ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक पहचान के लिए जाना जाता था, अब वही बिहार कैमरे की रोशनी में एक नई भूमिका निभा रहा है। राज्य धीरे-धीरे मुंबई के बाद देश का अगला बड़ा फिल्म डेस्टिनेशन बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। “लाइट, कैमरा, एक्शन” की गूंज अब पटना, राजगीर और नालंदा जैसे शहरों में सुनाई देने लगी है।
राज्य सरकार की फिल्म प्रोत्साहन नीति और आसान परमिट प्रक्रिया के चलते अब तक करीब 40 फिल्मों को बिहार में शूटिंग की अनुमति दी जा चुकी है। इनमें से अधिकांश प्रोजेक्ट पूरे भी हो चुके हैं, जिससे यह साफ है कि फिल्म निर्माताओं का भरोसा बिहार पर लगातार बढ़ रहा है।
फिल्म फ्रेंडली बनता बिहार
बिहार ने अब खुद को सिर्फ भोजपुरी या क्षेत्रीय सिनेमा तक सीमित नहीं रखा है। यहां अब हिंदी और अंग्रेजी फिल्मों की शूटिंग भी तेजी से बढ़ रही है। राज्य की फिल्म नीति ने परमिट, लोकेशन और प्रशासनिक सहयोग को सरल बनाकर निर्माताओं को एक सुरक्षित और सुविधाजनक माहौल दिया है।
फिल्म यूनिट्स को अब अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं काटने पड़ते। एक ही विंडो से अनुमति और सहयोग मिल रहा है, जिससे समय और लागत दोनों की बचत हो रही है।
लोकेशन बनी बिहार की ताकत
पटना के घाट, राजगीर की पहाड़ियां, नालंदा के खंडहर, गया के धार्मिक स्थल, भागलपुर की हरियाली और मोतिहारी की साहित्यिक विरासत—बिहार के ये सभी लोकेशन अब फिल्मों की कहानियों में जान डाल रहे हैं।
इन जगहों ने न केवल फिल्मों को एक नया विजुअल टच दिया है, बल्कि बिहार की छवि को देश और दुनिया में एक नए सिनेमा-फ्रेम में पेश किया है।
रोजगार और कारोबार को मिल रही रफ्तार
फिल्म शूटिंग से बिहार के स्थानीय कारोबार को बड़ा फायदा हो रहा है। होटल, कैटरिंग, ट्रांसपोर्ट, लाइटिंग, सेट डिज़ाइन और टेक्निकल स्टाफ जैसे क्षेत्रों में काम बढ़ा है।
हर फिल्म प्रोजेक्ट के साथ सैकड़ों स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलता है। इससे साफ है कि सिनेमा अब बिहार के लिए केवल कला नहीं, बल्कि आर्थिक विकास का मजबूत इंजन बनता जा रहा है।

युवाओं को मिल रहा तकनीकी प्रशिक्षण
बिहार राज्य फिल्म विकास निगम द्वारा वर्कशॉप, ट्रेनिंग प्रोग्राम और मास्टर क्लास आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें युवाओं को कैमरा ऑपरेशन, साउंड रिकॉर्डिंग, एडिटिंग और प्रोडक्शन मैनेजमेंट की ट्रेनिंग दी जा रही है।
इसका उद्देश्य यह है कि बिहार के युवा मुंबई या दूसरे शहरों में जाने के बजाय अपने ही राज्य में प्रोफेशनल बन सकें।
मुंबई में होगी बड़ी बैठक
कला एवं संस्कृति विभाग की पहल पर जल्द ही मुंबई में बड़े फिल्म निर्माताओं और निर्देशकों के साथ एक विशेष बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें बिहार को एक मजबूत फिल्म डेस्टिनेशन के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
इस बैठक का मकसद ज्यादा से ज्यादा प्रोजेक्ट बिहार लाना और राज्य को राष्ट्रीय सिनेमा मैप पर स्थायी जगह दिलाना है।
सिनेमा की नई प्रयोगशाला बनता बिहार
आज का बिहार सिर्फ इतिहास की धरती नहीं, बल्कि नए प्रयोगों की प्रयोगशाला बनता जा रहा है। कैमरे की नजर में चमकता यह राज्य आने वाले समय में भारतीय फिल्म उद्योग का बड़ा चेहरा बन सकता है।
जिस तरह से फिल्म निर्माता बिहार की ओर रुख कर रहे हैं, उससे साफ है कि “लाइट, कैमरा, एक्शन” अब सिर्फ मुंबई की पहचान नहीं रहा।




