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बिहू अटैक — एक बार देखने लायक संवेदनशील सैन्य ड्रामा

 (रेटिंग: 3.5/5)

सुज़ाद इक़बाल खान निर्देशित और प्रबीर कांता साहा निर्मित ‘बिहू अटैक’ (Bihu attack) 16 जनवरी 2026 को रिलीज हुई यह फिल्म सीमावर्ती राज्यों की जंजीरों वाले सच को बड़े परदे पर लाने की हिम्मत करती है। असम के लोक पर्व बिहू के माहौल में बुनी यह कहानी स्थानीय उग्रवाद, सीमा पार आतंकवाद और सेना-इंटेलिजेंस के जटिल तालमेल पर टिकती है — और अक्सर यह तालमेल ही फिल्म की सबसे मज़बूत कड़ी बनकर उभरता है।

कहानी की रीढ़ है राज कुँवर (देव मेनरिया) — एक ऐसा फौजी जो कोर्ट मार्शल का दर्द झेल चुका है मगर देशभक्ति से कभी विमुख नहीं हुआ। देव ने अपने किरदार में सादगी और मजबूती दोनों रखी हैं; उनके भावनात्मक दृश्यों में पिता और सैनिक के द्वंद्व को महसूस कर पाना आसान है। अरबाज खान खुफिया अधिकारी के रूप में सूझबूझ और कमर कसकर काम करते हैं, जबकि राहुल देव और हितेन तेजवानी का अनुभव-प्रधान अभिनय सीमित समय में भी असर छोड़ता है। बाकी कलाकार, खासकर अमी मिसोबा और युक्ति कपूर, फिल्म की लोकसांस्कृतिक विश्वसनीयता बढ़ाते हैं। आशुतोष सागर आतंकवादी के किरदार में कम समय में ही अपनी छाप छोड़े गए।

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निर्देशन के मामले में सुज़ाद इक़बाल खान ने संवेदनशील विषय को संवेदनशील ढंग से छुआ है — असम की संस्कृति, बोलचाल और परिधान को स्क्रीन पर प्रामाणिक दिखाने की कोशिश साफ़ नजर आती है। शुरुआती एक्शन तथा जंगल-सीन की ग्रिप अच्छी रहती है, पर बीच के हिस्से में कहानी थोड़ी फैलती और गति धीमी पड़ जाती है। सौभाग्य से अंतिम भाग फिर से फिल्म को पटरी पर लौटा देता है और क्लाइमेक्स तक पहुंचने का रास्ता असरदार बनता है।

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तकनीकी पक्ष — सिनेमैटोग्राफी और कॉस्ट्यूम-डिजाइन विशेष रूप से प्रशंसनीय हैं; सीमित संसाधनों के बावजूद सेट और लोकेशन असम का माहौल दे देते हैं। बैकग्राउंड स्कोर और एडिटिंग कभी-कभी और कसी हुई दिख सकती थी, पर कुल मिलाकर फिल्म का टोन बनाये रखने में ये मददगार हैं।

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निष्कर्ष में, ‘बिहू अटैक’ एक ऐसा प्रयास है जो देश की सुरक्षा और सीमावर्ती वास्तविकताओं पर रोशनी डालता है। कहानी की कुछ लचक और मिड-पार्ट की कमजोरी इसे परफेक्ट बनने से रोकती है, मगर अभिनय, संस्कृति-प्रस्तुति और इरादे इसे देखने लायक बनाते हैं। यदि आप आर्मी-इंटेलिजेंस और बॉर्डर-थ्रिलर फिल्मों के शौकीन हैं, तो यह फिल्म एक बार देखी जा सकती है — खासकर अगर आप असम के लोकपटल और बिहू के रंग-रूप को सिनेमा स्क्रीन पर देखना चाहते हों।

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