
राष्ट्रीय युवा दिवस 2026: स्वामी विवेकानंद के विचार आज भारत को दिशा : –
हर वर्ष 12 जनवरी को भारत राष्ट्रीय युवा दिवस मनाता है। यह दिन केवल एक जन्मतिथि नहीं, बल्कि एक विचारधारा का उत्सव है — उस विचारधारा का जो आत्मविश्वास, सेवा, चरित्र और साहस पर आधारित है। यह दिन भारत के महान संत, विचारक और समाज सुधारक स्वामी विवेकानंद को समर्पित है।
2026 में भी, जब भारत तकनीक, वैश्वीकरण और तीव्र परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, विवेकानंद के विचार पहले से अधिक प्रासंगिक प्रतीत होते हैं।
जन्म और प्रारंभिक जीवन
स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता के एक कुलीन बंगाली कायस्थ परिवार में हुआ। उनका मूल नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था। उनके पिता विश्वनाथ दत्त कलकत्ता हाईकोर्ट के प्रतिष्ठित वकील थे और माता भुवनेश्वरी देवी धार्मिक और संस्कारी महिला थीं।
नरेन्द्र बचपन से ही असाधारण प्रतिभाशाली, जिज्ञासु और तर्कशील थे। वे ईश्वर, जीवन और सत्य को लेकर प्रश्न करते थे — ऐसे प्रश्न जिनसे बड़े-बड़े विद्वान भी असहज हो जाते थे।
शिक्षा और बौद्धिक विकास
उन्होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज और स्कॉटिश चर्च कॉलेज में अध्ययन किया। दर्शन, वेदांत, उपनिषद के साथ-साथ उन्होंने पश्चिमी दार्शनिकों जैसे कांट, हेगेल, मिल और डार्विन का अध्ययन किया।
यह पूर्व और पश्चिम का यह संगम ही उन्हें एक वैश्विक विचारक बनाता है।
रामकृष्ण परमहंस से भेंट
नरेन्द्र के जीवन का निर्णायक मोड़ तब आया जब वे दक्षिणेश्वर में रामकृष्ण परमहंस से मिले। रामकृष्ण ने उन्हें यह सिखाया कि
“जीव ही शिव है — मनुष्य की सेवा ही ईश्वर की सेवा है।”
यहीं से नरेन्द्र का जीवन व्यक्तिगत मोक्ष से निकलकर सामाजिक सेवा की ओर मुड़ गया।
भारत भ्रमण और सामाजिक चेतना
रामकृष्ण की मृत्यु के बाद विवेकानंद ने संन्यास लिया और पैदल पूरे भारत की यात्रा की। उन्होंने गांवों में गरीबी, अशिक्षा, जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानता देखी।
यहीं उन्होंने समझा कि भारत की समस्या आध्यात्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक है — और समाधान शिक्षा और सेवा है।
शिकागो भाषण: भारत की आत्मा की वैश्विक घोषणा
11 सितंबर 1893 को शिकागो में विश्व धर्म महासभा में उनका उद्घाटन वाक्य —
“मेरे अमेरिकी बहनों और भाइयों” — इतिहास बन गया।
उन्होंने सहिष्णुता, सार्वभौमिकता और धार्मिक समरसता का संदेश दिया।
उस भाषण ने पश्चिम की भारत को देखने की दृष्टि बदल दी।
रामकृष्ण मिशन की स्थापना
1897 में उन्होंने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की, जो शिक्षा, स्वास्थ्य, आपदा राहत और समाज सेवा में आज भी अग्रणी है।
नारी सम्मान और नैतिक आदर्श
जब एक विदेशी महिला ने उनसे विवाह का प्रस्ताव रखा, तो उन्होंने कहा —
“मुझे अपना पुत्र बना लो, पति नहीं।”
यह नारी के सम्मान का उदाहरण है जो आज भी प्रेरणादायक है।
शिक्षा दर्शन
स्वामी विवेकानंद कहते थे —
“शिक्षा मनुष्य में निहित पूर्णता की अभिव्यक्ति है।”
वे किताबी ज्ञान से अधिक चरित्र निर्माण, आत्मनिर्भरता और साहस को शिक्षा का उद्देश्य मानते थे।
युवाओं के लिए संदेश
उनका प्रसिद्ध कथन —
“उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक मत रुको”
आज भी भारत के युवाओं के लिए प्रेरणा है।
राष्ट्रीय युवा दिवस का इतिहास
भारत सरकार ने 1984 में स्वामी विवेकानंद की जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस घोषित किया। 1985 से इसे हर वर्ष मनाया जा रहा है।
उद्देश्य — युवाओं में आत्मविश्वास, सेवा और राष्ट्रनिर्माण की भावना जाग्रत करना।
मृत्यु और विरासत
4 जुलाई 1902 को बेलूर मठ में उन्होंने ध्यानावस्था में महासमाधि ली। वे केवल 39 वर्ष के थे, लेकिन उनका प्रभाव शताब्दियों का है।
स्वामी विवेकानंद केवल संत नहीं थे — वे भारत की आत्मा की आवाज थे।
राष्ट्रीय युवा दिवस केवल स्मरण नहीं, बल्कि संकल्प का दिन है — उस भारत के लिए जो साहसी, समावेशी, शिक्षित और आत्मनिर्भर हो।
उनके शब्द आज भी गूंजते हैं:
“खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप है।”
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