बिहार विधानसभा का सोमवार का सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया, जब दिवंगत पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर सदन में तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। कार्यवाही शुरू होते ही लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के विधायक राजू तिवारी ने विपक्ष पर जोरदार हमला बोला और सार्वजनिक माफी की मांग कर दी।
राजू तिवारी ने कहा कि रामविलास पासवान जैसे वरिष्ठ और सम्मानित नेता के खिलाफ की गई टिप्पणी न केवल अनुचित है, बल्कि पूरे दलित और वंचित समाज का अपमान भी है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि विपक्ष सदन में माफी नहीं मांगता है तो उनकी पार्टी विधानसभा की कार्यवाही नहीं चलने देगी। तिवारी के इस बयान के बाद सदन का माहौल अचानक गरमा गया और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।
हंगामे के कारण कुछ समय के लिए कार्यवाही बाधित करनी पड़ी। विपक्षी सदस्यों ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी ओर से किसी तरह की आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं की गई है और मुद्दे को बेवजह तूल दिया जा रहा है। वहीं लोजपा (रामविलास) के विधायकों ने अपने रुख पर कायम रहते हुए कहा कि वे अपने नेता के सम्मान से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेंगे।
राजू तिवारी ने अपने वक्तव्य में कहा कि रामविलास पासवान ने अपना पूरा राजनीतिक जीवन समाज के कमजोर, दलित और पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित किया। उन्होंने कई दशकों तक राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई और केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। ऐसे नेता के खिलाफ कथित टिप्पणी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और विपक्ष को इसके लिए सार्वजनिक रूप से खेद प्रकट करना चाहिए।
सदन के भीतर जारी इस टकराव ने बिहार की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा सत्र के दौरान इस तरह के मुद्दों पर बढ़ता टकराव आगामी राजनीतिक रणनीतियों का संकेत भी हो सकता है।
फिलहाल विधानसभा अध्यक्ष की ओर से दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की गई है, लेकिन माहौल अभी भी तनावपूर्ण बना हुआ है। यदि विपक्ष माफी नहीं मांगता है, तो लोजपा (रामविलास) ने सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन की चेतावनी दी है। आने वाले दिनों में यह विवाद और तूल पकड़ सकता है, जिससे राज्य की सियासत में और गर्मी बढ़ने की संभावना है।




