- महिला विंग की पारंपरिक गीत-नृत्य प्रस्तुतियों ने समां बांधा
औरंगाबाद में होली की मस्ती, रंगों की छटा और सांस्कृतिक विरासत की गूंज के बीच ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस (जीकेसी) का होली मिलन समारोह भव्य रूप से संपन्न हुआ। शहर के चित्रगुप्त सभागार-सह-लोकनायक जयप्रकाश नारायण सांस्कृतिक भवन में आयोजित इस कार्यक्रम ने रंग और राग का ऐसा समन्वय प्रस्तुत किया, जिसने उपस्थित जनसमूह को उत्साह और उल्लास से भर दिया।
कार्यक्रम की खास बात रही महिला विंग की सक्रिय और प्रभावशाली भागीदारी। पारंपरिक होली गीतों पर आधारित नृत्य और समूहगान ने वातावरण को ब्रज की होली जैसा जीवंत बना दिया। “ऐसी होली खेली कन्हाई…” और “होली खेले रघुबीरा अवध में…” जैसे गीतों की मधुर स्वर लहरियों के बीच अबीर-गुलाल उड़ते ही पूरा सभागार रंगोत्सव में सराबोर हो गया। महिलाओं ने अपनी सधी प्रस्तुतियों से संस्कृति, परंपरा और सामूहिक सौहार्द का अद्भुत संदेश दिया।
लोकगायन और पारंपरिक नृत्य ने समारोह की गरिमा को और बढ़ाया। दानिका संगीत संस्थान के कलाकारों ने भी अपनी प्रस्तुतियों से कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। शास्त्रीय और लोकधुनों के संगम ने यह साबित किया कि होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पहचान का भी प्रतीक है।
समारोह का उद्घाटन जीकेसी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. कमल किशोर सहित अन्य पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से किया। उद्घाटन संबोधन में डॉ. कमल किशोर ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने और परंपराओं के संरक्षण का माध्यम हैं। उन्होंने इसे सांस्कृतिक एकता और सामाजिक समरसता का प्रतीक बताया।
कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से आए गणमान्य लोगों की उपस्थिति ने आयोजन को गरिमामयी बना दिया। सैकड़ों लोगों ने इस रंगारंग उत्सव में भाग लेकर आपसी भाईचारे और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने का संकल्प दोहराया।
गुलाल से सजे चेहरों और उत्साह से भरे मनों के बीच यह संदेश स्पष्ट रूप से उभरा कि होली केवल उत्सव नहीं, बल्कि प्रेम, अपनत्व और सामाजिक समरसता की जीवंत अभिव्यक्ति है।




