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Book Review: Dynamic डी. एम; सहयोग से सुशासन, सुशासन से समृद्धि

पुस्तक समीक्षा — डायनेमिक डी.एम.: सहयोग से सुशासन, सुशासन से समृद्धि (लेखिका: कुमुद वर्मा द्वारा संकलित; विषय-वस्तु: डॉ. हीरा लाल, IAS)

Dynamic DM Book Review : जब मुझे अक्टूबर 2023 में डॉ. हीरा लाल, IAS द्वारा डाक के माध्यम से यह पुस्तक Dynamic DM मिली, तो पहले कुछ पन्ने मात्र न पढ़कर मेरी उत्सुकता जाग उठी — यह केवल एक शासकीय अनुभव-ग्रंथ नहीं बल्कि एक विचार-यात्रा थी। कुमुद वर्मा जी ने जिस संवेदनशीलता और सूक्ष्मता से डॉ. हीरा लाल के प्रशासनिक अनुभवों, प्रयोगों और दर्शन को संजोया है, वह पाठक को हाथ पकड़े–पकड़े चलने जैसा भरोसा देता है। यही वजह है कि यह पुस्तक न सिर्फ अफसरों के लिये बल्कि हर जागरूक नागरिक के लिये महत्वपूर्ण है।

सार-विषय
पुस्तक का मूल संदेश सरल और महत्त्वपूर्ण है: सुशासन केवल नियमों का पालन करवाना नहीं, बल्कि सहयोग की संस्कृति बनाकर समाज के हर सदस्य को विकास के कारक के रूप में जोड़ना है। ‘डायनेमिक डी.एम.’ में डॉ. हीरा लाल के जीवन-और-प्रशासन के अनुभवों के माध्यम से यह दिखाया गया है कि कैसे सीमित संसाधन और बजट जैसी बाधाओं के बीच भी सोच, दृष्टिकोण और सामूहिक सहयोग के बल पर असाधारण परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। बाँदा, बस्ती और अन्य जिलों में किसी ग्राम के सर्वांगीण विकास के मॉडल को बिना बड़े बजट के लागू करने की जो कहानियाँ और मैनिफेस्टो-प्रोजेक्ट्स पुस्तक में समाहित हैं, वे बेहद प्रेरणादायक हैं।

लेखन-शैली एवं संरचना
कुमुद वर्मा की भाषा सरल, स्पष्ट और संवेदी है। जहाँ एक ओर प्रशासनिक तर्क और नीति-नियमन का तारिक ढाँचा मिलता है, वहीं दूसरी ओर मानवीय दृष्टि, व्यक्तिगत संघर्ष और जनता के प्रति करुणा का भाव भी बना रहता है। अध्याय व्यवस्थित हैं—प्रत्येक अनुभाग में वास्तविक घटनाक्रम, चुनौती और समाधान के चरणबद्ध विवेचन मिलते हैं। केस-स्टडी, स्थानीय उदाहरण और ‘ग्राम-मॉडल’ की संकल्पनाएँ प्रैक्टिकल हैं — इन्हें पढ़कर कोई भी अधिकारी, कर्मचारी या स्वयंसेवी इन्हें मोबिलाइज़ कर सकता है।

मुख्य विचार और पाठ
पुस्तक में कई बार दोहराया गया मूल भाव है—ज्ञान ही शक्ति है। डॉ. हीरा लाल मानते हैं कि शिक्षा, जागरूकता और सामूहिक सहारे के बिना सतत् विकास सम्भव नहीं। वे लोकोन्मुखी, ‘माधुर्य भाव’ के साथ प्रशासन का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं—ऐसा प्रशासन जो राष्ट्रीय अस्मिता और स्थानीय आत्मनिर्भरता दोनों को साथ लेकर चले। 30 से अधिक मैनिफेस्टो के अंतर्गत प्रस्तुत मॉडल-ग्राम का विचार एक व्यवहारिक अनुभव है, जहाँ विचारशीलता और न्यूनतम संसाधन के साथ बड़े परिवर्तन दिखे। पुस्तक में यह भी स्पष्ट है कि सुशासन केवल तकनीकी दक्षता नहीं, बल्कि नैतिक बल, जनसहभागिता और नेतृत्व-दृष्टि का सम्मिलित परिणाम है।

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प्रभाव और पठनीयता
यह पुस्तक सिविल सेवा के छात्रों, प्रशिक्षु अधिकारियों और अनुभवी प्रशासकों के लिये अमूल्य है। जहाँ तोते की तरह पाठ्यक्रम-ज्ञान का उपयोग होगा, वहीं यहाँ ‘फील्ड-ज्ञान’ और ‘पल-पल के व्यवहारिक निर्णय’ का पाठ मिलता है। सामान्य पाठक के लिये भी पुस्तक प्रेरक है—क्योंकि यह बताती है कि किस प्रकार छोटा-सा प्रयास या दृष्टिकोण बदल कर किसी गाँव की किस्मत बदली जा सकती है। भाषा प्रेरक होने के साथ-साथ क्रियान्वयन-उन्मुख है; उदाहरण और सुझाव ऐसे कि पाठक तत्काल कुछ लागू करने की कोशिश करना चाहेगा।

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कमियाँ और संवेदनाएँ
यदि किसी आलोचना की बात की जाए तो पुस्तक के कुछ हिस्सों में सिद्धांत और व्यवहार के बीच और अधिक तफसील, या किसी प्रोजेक्ट की लागत-लाभ विश्लेषण की संक्षिप्त सारणी रखी जा सकती थी—ताकि नीति-निर्माता और अन्य अधिकारी उसे शीघ्रता से अनुकूलित कर सकें। कुछ स्थानीय-परिस्थितियों के संदर्भ अधिक ग्राफिक्स या मैप्स के साथ प्रस्तुत होते तो पठनीयता और व्यावहारिकता और बेहतर होती। पर ये छोटे-छोटे सुधार हैं; कुल मिलाकर पुस्तक का दृष्टिकोण और परिणाम-आधारित कहानी बहुत प्रभावशाली है।

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निर्णायक सिफारिश
मैं पूरे विश्वास से कहता हूँ कि “डायनेमिक डी.एम.: सहयोग से सुशासन, सुशासन से समृद्धि” हर प्रशासकीय पुस्तक-श्रेणी में महत्वपूर्ण स्थान बनाएगी। यह पुस्तक न केवल आईएएस या प्रशासनिक क़क्ष के लिये मोल-की-चीज़ है, बल्कि नागरिक समाज, एनजीओ, ग्राम-समूह और युवा नेतृत्व के लिये भी प्रेरणास्रोत है। युवा अधिकारियों को इससे मिलती है व्यावहारिक नीति निर्माण की सीख; आम नागरिक को यह दिखाती है कि परिवर्तन के लिये केवल पैसा ही नहीं, दृष्टि और सहयोग भी पर्याप्त हैं।

डॉ. हीरा लाल (Dr. Heera Lal IAS) के जीवन-दर्शन और कुमुद वर्मा (Kumud Verma) के संवेदनशील संकलन ने मिलकर एक ऐसी किताब दी है जो आज के भारत के लिए आवश्यक है—वह भारत जो स्थानीय शक्ति, सामूहिक चेतना और व्यवहारिक सुशासन से समृद्धि की ओर बढ़ना चाहता है। मैं समर्पण-भाव से कहता हूँ—यह पुस्तक पढ़ें, समझें और लागू करने की कोशिश करें। इसे पढ़कर जो जज़्बा और मार्गदर्शन मिलता है, वह सुदृढ़ नेतृत्व और समाज-निर्माण दोनों के लिये अनिवार्य है।

धन्यवाद एवं सादर प्रणाम,
एन. मंडल

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N Mandal

Naresh Kumar Mandal, popularly known as N. Mandal, is the founder and editor of Gaam Ghar News. He writes on diverse subjects including entertainment, politics, business, and sports, with a deep interest in the intersection of cinema, politics, and public life. Before founding Gaam Ghar News, he worked with several leading newspapers in Bihar.

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